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दलितों और अल्पसंख्यको को निशाना बनाने के लिए बांटी जा रहीं ये गोपनीय किताब

नई दिल्ली। देश में कथित राष्ट्रवाद की आड़ में नफरत के बीज बोने का सिलसिला जारी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर शेयर किये गए एक कथित गोपनीय दस्तावेज से खुलासा हुआ है कि देश में दलितों और मुस्लिमो को घेरने की साजिश एक योजनावद्ध तरीके से की जा रही है।

अखिल भारतीय हिन्दू प्रचार संघ द्वारा प्रकाशित एक कथित पुस्तक को गोपनीय दस्तावेज का नाम देकर बांटा जा रहा है। इस किताब में अंतिम पेज पर साफ़ लिखा है कि यह पूर्णतः गोपनीय दस्तावेज है। किसी भी हालत में अनुसूचित जाति /जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी या हिन्दू धर्म के विरोध में काम करने वाले व्यक्ति के हाथो में नहीं लगना चाहिए। इस किताब पर अखिल भारतीय हिन्दू प्रचार संघ वाराणसी का नाम लिखा हुआ है।

किताब के जो पेज मिले हैं उन्हें पढ़कर साफ़ ज़ाहिर होता है कि एक सोची समझी चाल के तहत देश को जातिगत और धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। किताब को “हिन्दू धर्म संसद द्वारा अनुमोदित गोपनीय दस्तावेज” कहा गया है।

किताब में आरएसएस के मुख्यालय नागपुर का हवाला देकर कहा गया है कि यहाँ प्रत्येक 15 अगस्त और 26 जनवरी को भगवा ध्वज फहराया जाए। इतना ही नहीं किताब में भारतीय संविधान की जगह मनु स्मृति लागू करने और संसद भवन परिसर से डा भीमराव अंबेडकर की मूर्ति की जगह मनु की मूर्ति लगाए जाने की बात कही गयी है।

किताब में मुख्यतः दलितों और अल्पसंखयको को निशाना बनाये जाने की बात कही गयी है। इसमें ये भी दावा किया गया है कि देश के लोकतांत्रिक स्वरुप को ख़त्म करके राम राज्य और हिन्दू राष्ट्र की स्थापना की जाएगी।

इस किताब में जिन बातो का उल्लेख किया गया है वे कटटरता और जातिगत व् धार्मिक भेदभाव पैदा करने वाली हैं। किताब के पेज नंबर 14 पर लिखा है कि “अधर्मी अंबेडकर, पासवान, मायावती, रामराज के कारण बौद्ध धर्म पुनः अस्तित्व में आने लगा है। हमे पुनः इस धर्म के प्रभाव को दूरदर्शिता के साथ नाश करना होगा। वो कूटनीति अपनानी होगी जो हमने मुसलमानो को खदेड़ने के लिए जिस प्रकार बाबरी मस्जिद गिरायी, सिखों को नियंत्रित करने के लिए आतंकवादी घोषित करके हमने घर घर में कत्लेआम करवाया। अनुसूचित जाति /जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्ग ओबीसी के आरक्षण को सुप्रीमकोर्ट के जजों की मदद से ख़त्म करवाया।”

इस पेज पर आगे कहा गया है कि “अब हमारा उद्देश्य है कि अंबेडकर के संविधान को पूर्णतः नष्ट करके देश में लोकतंत्र के स्थान पर राम राज्य की स्थापना, भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने, संस्कृत को राष्ट्र भाषा बनाने और मनु स्मृति के आधार पर संविधान की नई रचना करने, संसंद में अंबेडकर की मूर्ति को नष्ट करके उसके स्थान पर मनु की विशाल प्रतिमा स्थापित करना।”

किताब में पेज नंबर 15 पर केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी का हवाला देते हुए लिखा गया है कि देश के मुसलमानो का मुख्य व्यवसाय मांस की विक्री करना है और मेनका गाँधी ने ये विश्वास दिलाया है कि देश में मांस की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया जायेगा।

अभी यह पता नहीं चल सका है कि यह किताब कितने पेज की है, इसे कब प्रकाशित किया गया और इसके पीछे कौन कौन चेहरे हैं। अभी यह जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो सकी है क्या इस किताब की भनक उत्तर प्रदेश सरकार को है या नहीं ? लेकिन इस किताब पर जो स्थान (वाराणसी) लिखा है वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है।

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