तीन तलाक विघेयक पर ये हैं अंदर की बात “विवाह के मामले फौजदारी अपराध नहीं हो सकते”

नई दिल्ली। तीन तलाक विधेयक राज्य सभा में पास नहीं हो सका। सरकार और विपक्ष के बीच फंसा पेंच शीत्तकालीन सत्र के आखिरी दिन तक नहीं निकल सका। तीन तलाक वाले विधेयक को विपक्ष सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग पर अड़ा रहा वहीँ सरकार ने भी मामला हल करने की दिशा में लचीला रुख नहीं दिखाया।

शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन संसद मार्ग पर बीजेपी द्वारा मुस्लिम महिलाओं से प्रदर्शन कराया गया। पूरे मामले में देखा जाए तो बीजेपी की रूचि बिल पास कराने से ज़्यादा कांग्रेस को महिला विरोधी साबित करने में अधिक दिखाई दी।

जानकारों की माने तो विपक्ष की मांग अपनी जगह जायज है। ऐसे में सरकार को चाहिए था कि वह बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजकर सम्मान के साथ राज्य सभा के शीतकालीन सत्र का समापन करती लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया और मामला बजट सत्र तक टल गया।

कानून के जानकारों की माने तो सुप्रीमकोर्ट के अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा का कहना है कि तीन तलाक पर अध्यादेश लाने के लिए कानूनी तौर पर सरकार के लिए कोई मनाही नहीं है। हालांकि परंपरा यही रही है कि संसद में लंबित विधेयक पर अध्यादेश नहीं लाया जाता।

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने राज्यसभा में कहा था कि सरकार इस विधेयक को इसलिए पारित कराना चाहती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इस बारे में 6 महीने के भीतर संसद में कानून बनाया जाए। ’

इस बारे में तनखा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 माह के भीतर कानून बनाने का जो आदेश दिया था, वह अल्पमत का दृष्टिकोण है। इस बारे में बहुमत वाले दृष्टिकोण में इसका कोई जिक्र नहीं है।

प्रसिद्द अधिवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक पर जो रोक लगाई है, वह स्वयं अपने में एक कानून बन चुका है। न्यायाधीश का फैसला अपने आप में एक कानून है। विधायिका तो केवल उसे संहिताबद्ध करता है।

उन्होंने कहा कि झगड़ा फैसले को लेकर नहीं बल्कि सरकार द्वारा इस विधेयक में जो अतिरिक्त बातें जोड़ी गई हैं, उसको लेकर है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया, ‘आप अपने राजनीतिक लाभ के लिए इसका (तीन तलाक देने के आरोप का) अपराधीकरण कर रहे हैं। विवाह के मामले फौजदारी अपराध नहीं हो सकते।’

इस मामले में कांग्रेस ने राज्य सभा में साफ़ तौर पर कहा था कि वह बिल पास कराये जाने के विरुद्ध नहीं है लेकिन इसमें मौजूद खामियों को दूर किये जाने की ज़रूरत है।

विपक्ष के नेता गुलामनबी आज़ाद ने कहा कि हम इस बिल के विरोध में नहीं हैं। हम इसमें मौजूद खामियों के अध्यन के लिए इसे सेलेक्ट कमेटी को सौंपे जाने की मांग कर रहे हैं। इस बिल में कई ऐसी चीज़ें हैं जिनसे महिलाओं को दिक्क्त झेलनी पड़ेगी। हम चाहते हैं कि इस बिल में मौजूद खामियों को दूर किया जाए उसके बाद इसे पास कराया जाए।

अब क्या होगा :

सरकार इस बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेज सकती है या विपक्ष द्वारा सुझाये गए संशोधनों को अपनी तरफ जोड़ कर इसे बजट सत्र में पास कराने के लिए रख सकती है।

वहीँ कांग्रेस सूत्रों की माने तो बिल में सुझाये गए संशोधनों पर विपक्ष एक इंच भी कदम वापस खींचने और समझौता करने को राजी नहीं है। ऐसे में सरकार को या तो इसे बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना होगा या संशोधनो के साथ बिल को पेश करना होगा।

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *