उत्तर प्रदेश

ताजमहल का चमेली फर्श हुआ खराब, अधिकारियों को खबर तक नहीं

आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल रखरखाव के आभाव में उसकी की हालत खस्ता हो चुकी है। सैलानियों के बढ़ते बोझ तले स्मारक के पत्थर घिस रहे हैं। चमेली फर्श के पत्थरों में गड्ढे हो चुके हैं। स्मारक की छवि सुधारने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) कोई ध्यान नहीं दे रहा है। कंपोजिट प्लान में यहां संरक्षण का प्रस्ताव है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है।

ताजमहल में मुख्य मकबरे पर जाने से पूर्व चमेली फर्श पर चढ़ना होता है। भारतीय सैलानी मेहमानखाना की ओर से चमेली फर्श पर पहुंचते हैं, जबकि विदेशी सैलानी मस्जिद की ओर से यहां आते हैं। मेहमानखाना की तरफ चमेली फर्श के पत्थर खराब हो रहे हैं। पत्थरों में लोनी लगने की वजह से उनमें गड्ढे हो चुके हैं। ताज की यह दशा देख अप्रैल, 2015 में आई संसद की पर्यावरण संबंधी स्थाई समिति ने भी नाराजगी जताई थी।

समिति के निर्देशों पर एएसआइ ने ताज के संरक्षण व रखरखाव को कंपोजिट प्लान तैयार किया था। इसमें मेहमानखाना की तरफ के खराब पत्थर बदलने का प्रस्ताव भी था। स्मारक में पाथवे के खराब पत्थर तो बदले गए, लेकिन दो वर्ष बाद खराब पत्थरों को बदलने का काम शुरू नहीं हो सका है।

अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. भुवन विक्रम कहते हैं, चमेली फर्श के अधिक खराब हो चुके पत्थरों को बदलवाया जाएगा। सभी पत्थर नहीं बदले जा सकते हैं।

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