डा कफील के खिलाफ नहीं मिला कोई सबूत, पुलिस ने भ्रष्टाचार का मामला भी हटाया

गोरखपुर। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चो की मौत के बाद बाल रोग विशेषज्ञ डा कफील पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप को पुलिस ने हटा लिया है।

डा कफील खान उन नौ लोगों में से एक थे, जिन्हें बच्चों की मौत के बाद गिरफ्तार किया गया था। बच्चों की मौत कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई थी।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कफील खान के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। इससे पहले पुलिस ने मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव मिश्रा और कफील खान के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

गोरखपुर के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने कहा कि डॉक्टर खान के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और इंफार्मेशन एंड टेक्नॉलॉजी एक्ट के तहत चार्जशीट नहीं दायर की गई है।

उन पर आईपीसी के सेक्शन 409, 308 और 120-बी के तहत चार्जशीट दायर की गई है। वहीं डॉक्टर मिश्रा पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत चार्ज भी लगाए गए हैं। पुलिस ने ये चार्जशीट 27 अक्टूबर को दायर की थी।

वहीँ गोरखपुर हादसे पर जिला अधिकारी की जांच रिपोर्ट में डा कफील को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया था। डीएम की जांच रिपोर्ट में बालरोग विभाग के प्रमुख डॉक्टर कफील खान को क्लीनचिट दी गई थी। डीएम की जांच रिपोर्ट में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया था कि अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने के पीछे सबसे ज्यादा लापरवाही आरके मिश्रा की ओर से हुई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि वित्तीय गड़बड़ी के चलते अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हुई। इस ओर भी इशारा किया गया कि अस्पताल में ऑक्सीजन की खरीद में कमीशखोरी हो रही थी।

डीएम की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि एनीसथीसिया विभाग के एचओडी और ऑक्सीजन सप्लाई प्रभारी डॉक्टर सतीश ने ड्यूटी निभाने में लापरवाही बरती। इन दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस बात की जानकारी रखें कि अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित न हो पाए। साथ ही ये भी जिम्मेदारी बनती है कि वे ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी की बकाया भुगतान के लिए संबंधित विभाग को संपर्क करते, लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया। इन पर आरोप लगाया गया है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के बार-बार बिल भेजने के बाद भी इन्होंने उसके भुगतान में तत्परता नहीं दिखाई।

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