ट्रिपल तलाक पर टेंशन में सरकार, जदयू ने कहा ‘बिल के विरोध में करेंगे वोट’

पटना। ट्रिपल तलाक बिल को लेकर बीजेपी की टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रहीं। जहाँ विपक्ष के अधिकांश दल ट्रिपल तलाक बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग कर रहे हैं वहीँ अब एनडीए के सहयोगी दलों ने भी सरकार को टेंशन दे दिया है।

एनडीए की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड ने भी साफ़ शब्दों में कहा है कि ट्रिपल तलाक बिल जल्दबाज़ी में लाया गया है और यदि इस बिल पर राज्य सभा में मतदान हुआ तो जनता दल यूनाइटेड इस बिल के खिलाफ वोट करेगा।

हालाँकि बीजेपी ने जदयू का बयान आने के बाद बीजेपी सांसद सीपी ठाकुर ने जदयू का नाम लिए बिना कहा कि ‘कुछ पार्टियां तीन तलाक पर वोटबैंक की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘कुछ पार्टियों को लगता है कि यदि वे तीन तलाक बिल का समर्थन करेंगी तो उन्‍हें एक समुदाय विशेष के वोट नहीं मिलेंगे।’

इससे पहले जदयू के वरिष्‍ठ नेता वशिष्‍ठ नारायण सिंह ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में कहा कि ‘हमें लगता है कि यह बिल जल्‍दबाजी में लाया गया है. इसे टाला जा सकता था और इस पर सोच विचार करना चाहिए था।’ बिल पर वोटिंग के सवाल पर सिंह ने कहा, ‘हम सरकार के खिलाफ वोट करेंगे।’

गौरतलब है कि ट्रिपल तलाक बिल लोकसभा में पारित हो चूका है और अब सरकार की कोशिश है कि इसे किसी तरह राज्य सभा में भी पारित कराया जाए। राज्य सभा में सरकार के पास बहुमत नहीं होने के कारण उसे विपक्ष के सहयोग की दरकार है लेकिन विपक्ष इस बिल को सेलेक्ट कमेटी वापस भेजे जाने की मांग पर अड़ा है।

इससे पहले 31 दिसंबर को राज्य सभा में ट्रिपल तलाक बिल पेश किया जाना था लेकिन हंगामे के चलते यह बिल पेश नहीं हो सका। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने तीन तलाक पर कहा, ‘यह इतना महत्वपूर्ण बिल है जो सकारात्मक और नकारात्मक तौर पर करोड़ों लोगों की जिंदगी को प्रभावित करेगी। इसे सिलेक्ट कमेटी के पास भेजे बिना पास नहीं किया जा सकता।’

उन्होंने कहा कि विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा किए बगैर इस बिल पर चर्चा मुमकिन नहीं है। आजाद ने कहा कि यह बिल काफी अहम है और कई लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। इसे बगैर किसी कमेटी में भेजे पारित करना ठीक नहीं है, सरकार बिल को पारित कराना चाहती है, सिर्फ इसके लिए इसे नहीं पारित किया जाना चाहिए।

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि तीन तलाक बिल पर राजनीति सरकार कर रही है और राज्यसभा को रबर स्टंप नहीं है। शर्मा ने कहा कि हम बिल को पारित कराना चाहते हैं लेकिन बिल को पहले सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए, क्योंकि बिना जांचे-परखे इस बिल पर मुहर नहीं लगाई जा सकती है।

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