जुनेद क़ाज़ी का पीएम मोदी को पत्र: कहा ‘भारत में भी बने मोब लीचिंग के खिलाफ कठोर कानून’

न्यूयॉर्क। इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस यूएसए के पूर्व अध्यक्ष जुनेद क़ाज़ी ने मोदी सरकार से मांग की है कि भारत में भी मोब लींचिंग के खिलाफ तुरंत कड़ा कानून बनाया जाये।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए एक पत्र में जुनेद क़ाज़ी ने कहा है कि हमारे देश में पिछले दिनों भीड़ द्वारा पीट पीट कर जान लेने के अपराध की एक नई पद्धति शुरू हो गयी है। भीड़ द्वारा कानून को अपने हाथो में लेने और सामूहिक रूप से हमला करने वालो के खिलाफ यदि सख्त कानून अमल में नहीं लाया गया तो इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाना मुश्किल हो जायेगा और मोब लीचिंग की घटनाएं आम हो जाएँगी।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि चूँकि मोब लीचिंग का काम भीड़ द्वारा किया जाता है इसलिए ऐसे मामले में दोषी लोगों की पहचान कर पाना और दोषी लोगों के बच निकलने की संभावना होती है इसलिए मोब लीचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए कानून बनाया जाना आवश्यक हो गया है।

उन्होंने कहा कि मोब लीचिंग की घटनाओं में सोशल मीडिया और सोशल मेसेजिंग एप्प व्हाट्सएप्प के इस्तेमाल से साफ़ है कि मोब लीचिंग की घटनाएं सुनियोजित होती हैं। ऐसी घटनाएं कुछ विशेष लोगों द्वारा प्रायोजित किया जाता है।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि मोब लीचिंग पर दुनियाभर के देश कानून बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अमेरिका में भी मोब लीचिंग के खिलाफ कानून पास हो गया है। ऐसे में अब हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम मोब लीचिंग की घटनाओं को होने से रोकने के लिए इसके खिलाफ कठोर कानून लाएं।

उन्होंने कहा कि मोब लीचिंग के खिलाफ कानून इतना कठोर होना चाहिए कि मोब लींचिंग की घटना में शामिल होने से लोग डरें साथ ही अफवाहे फैलाकर ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देने वाले भी कानूनी कार्यवाही के दायरे में आ सकें।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो वह आईपीसी और सीआरपीसी में नए प्रावधान जोड़ सकती है लेकिन ये प्रावधान इतने कड़े होने चाहिए जो दोषी लोगों को सख्त सजा दिला सकें। उन्होंने कहा कि मोब लींचिंग के खिलाफ कानून बनाने से भविष्य में होने वाली घटनाओं पर विराम लगेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले जुनेद क़ाज़ी मुसलमानो को पाकिस्तान भेजने वाले जुमलों के खिलाफ आवाज़ उठा चुके हैं। उन्होंने मांग की थी कि यदि कोई किसी व्यक्ति को पाकिस्तान जाने की सलाह दे तो उस पर कड़ी कार्रवाही होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन पिटीशन भी किया था।

गौरतलब है कि पिछले एक साल के दौरान देश के नौ राज्यों में करीब 40 लोगों की भीड़ हिंसा में मौत को देखते हुए जीओएम और सचिवों की समिति बनाई गई थी। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश बाद जुलाई में भीड़ हिंसा से निपटने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया था।

समिति ने संसदीय अनुमोदन के जरिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता में नए प्रावधान शामिल कर कानून को सख्त बनाने की सिफारिश की है। साथ ही समिति ने भीड़ हिंसा के पीड़ितों को केंद्र द्वारा सहायता और आरोपियों पर गैर जमानती धारा लगाने का सुझाव दिया था।

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