जांच में नहीं मिला गौमांस, हरियाणा सरकार को फटकार, व्यापारी को दो लाख का मुआवज़ा

पलवल। बीफ रखने के एक मामले में कोर्ट ने हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार द्वारा की गयी कार्यवाही पर कड़ी फटकार लगायी है। हरियाणा पुलिस ने जिस कारोबारी के पास से बीफ बरामद होने का दावा कर उसे जेल भेज दिया था उसे कोर्ट ने रिहा करते हुए हरियाणा सरकार से  कारोबारी को दो लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश भी दिया है।

मामला वर्ष 2016 का है। हरियाणा पुलिस ने एक ट्रक में बिना सरकार की अनुमति के बीफ ले जाने का दावा करते हुए एक मीट कारोबारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस द्वारा मीट भरा टक पड्कने की बात जब फैली तो भीड़ जमा हो गयी और इस ट्रक को आग के हवाले कर दिया गया था। इतना ही नहीं ट्रक में सवार लोगों के साथ मारपटी की गई।

पुलिस का दावा था कि ट्रक में गौमांस लदा था। इसके सेम्पल जांच के लिए लेबोरेट्री भेजे गए थे। लेकिन जांच में पाया गया कि ट्रक में जा रहा मीट गौमांस नहीं था। प्रयोगशाला की जांच में यह साबित हुआ है कि ट्रक में बीफ नहीं बल्कि मटन ले जाया जा रहा था जबकि खालें गाय की ना होकर दूसरे पशुओं की थीं।

हरियाणा पुलिस ने इस मामले में मुबारिक, अजीज, आसिफ, राहुल, शीशपाल, भूरा, विष्णु और गिरिराज को अवैध तरीके से गौमांस ले जाने की धाराओं के तहत अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।

पलवल की एक अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने हरियाणा पुलिस की लापरवाही और झूठी कहानी पर नाराज़गी ज़ाहिर की। इतना ही नहीं अदालत ने इस पूरे केस को गंभीर सरकारी लापरवाही माना है और 30 दिन के अंदर आरोपियों को दो लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला सुनाया है।

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