जस्टिस जोसेफ मामले में कपिल सिब्बल ने कहा ‘सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में आज काला दिन’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच जस्टिस केएम जोसेफ समेत कुल तीन जजों ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली।

मंगलवार को सीजेआई दीपक मिश्रा ने अपने अदालत कक्ष में आयोजित समारोह में जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस के एम जोसेफ को पद की शपथ दिलाई।

वहीँ जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता को घटाने के केंद्र सरकार के फैसले से उच्चतम न्यायालय के कोलेजियम के कुछ सदस्यों के साथ सुप्रीम कोर्ट के कई जज नाखुश हैं। वहीं अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने जस्टिस केएम जोसेफ के पद घटाने को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने इसके लिए सरकार पर भी हमला बोला है।

जस्टिस जोसेफ की शपथ से पहले  सिब्बल ने ट्वीट कर कहा कि आज अदालत के इतिहास में काला दिन है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपनी आत्मा के खोज करने जरूरत है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार ने संदेश दिया है कि यदि कोई जज उनके पक्ष में फैसला नहीं देता है, तो उसके साथ ऐसा बर्ताव किया जा सकता है। इस दिन को भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ‘काले दिन’ के रूप में देखा जाएगा। यह सरकार का अहंकार है।

अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 25 हो गई है जबकि सुप्रीम कोर्ट में जजों के स्वीकृत पद 31 हैं। साथ ही जस्टिस इंदिरा बनर्जी सुप्रीम कोर्ट के 68 साल के इतिहास में आठवीं महिला जज हो गई हैं साथ ही पहली बार ऐसा हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट में एक साथ तीन महिला जज होंगी। जबकि इससे पहले एक समय में अधिकतम दो महिला जज ही सुप्रीम कोर्ट में रही हैं।

इससे पहले केंद्र ने 30 अप्रैल को जस्टिस जोसेफ पर कोलेजियम की सिफारिश को लौटा दिया था। केंद्र ने अनुभव का मसला उठाते हुए तर्क दिया था कि जस्टिस जोसेफ वरीयता क्रम में देश में 42वें स्थान पर आते हैं।

वहीँ दूसरी तरफ जस्टिस जोसेफ के नाम पर केंद्र की आपत्ति को उनके उत्तराखंड चीफ जस्टिस के तौर पर सूबे में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को खारिज करने से जोड़ कर देखा जा रहा था। जस्टिस जोसेफ की पीठ के इस निर्णय के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था। इसके बाद कांग्रेस की हरीश रावत सरकार की वापसी हुई थी।

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