जम्मू कश्मीर में लागू हुआ राज्यपाल शासन, 2019 से पहले यही चाहती थी बीजेपी

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाने के फैसले को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। जम्मू कश्मीर में चार दशक मेंआठवीं बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जम्मू कश्मीर में बीजेपी के एजेंडे से अलग जा रही पीडीपी के चलते भारतीय जनता पार्टी ने सरकार से समर्थन वापस लिया। समर्थन वापस लेने के बीजेपी के कदम को 2019 के आम चुनावो से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा ने कहा कि राज्य में बढ़ते कट्टरपंथ और आतंकवाद के चलते सरकार में बने रहना मुश्किल हो गया था।

वहीं जानकारों की माने तो जम्मू कश्मीर में हालत सामन्य न हो पाना बीजेपी की बड़ी विफलता माना जा रहा था। इसलिए समय रहते बीजेपी ने खुद को सरकार से अलग कर लिया।

माना जा रहा है कि कश्मीर में बढ़ती आतंकवाद की घटनाओं से बीजेपी की देशभर में किरकिरी हो रही थी। वहीँ कश्मीर से धारा 370 समाप्त करने की मांग उठाती रही बीजेपी के जम्मू कश्मीर सरकार में शामिल होने के बाद धारा 370 खत्म करने के उसके पुराने वादों को लेकर सवाल उठ रहे थे।

बता दें कि बीजेपी विपक्ष में रहते हुए समय समय पर कश्मीर से धारा 370 खत्म करने की मांग करती रही है। कई चुनावो में बीजेपी ने कश्मीर से धारा 370 हटाने को अपने चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा भी बनाया है।

राजनाथ और महबूबा को नहीं थी खबर:

जम्मू कश्मीर में बीजेपी महबूबा सरकार से समर्थन वापस लेने जा रही है, इसके खबर न तो गृहमंत्री राजनाथ सिंह को थी और न ही प्रदेश की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को थी। सूत्रों की माने तो जब बीजेपी की तरफ से समर्थन वापसी का एलान हुआ तो गृह मंत्री राजनाथ सिंह अपने कार्यालय में थे और समर्थन वापसी की खबर के बाद वे अपने कार्यालय से घर चले गए।

वहीँ महबूबा मुफ़्ती को जम्मू कश्मीर सरकार से बीजेपी के समर्थन वापस लेने की जानकारी राज्यपाल कार्यालय से आये फोन से पता चला। इसके बाद उन्होंने पीडीपी नेताओं के साथ एक बैठक आयोजित की और बाद में वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा देने पहुंचीं।

राज्यपाल का कार्यकाल हो रहा खत्म:

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एनएन बोहरा का कार्यकाल 25 जून को समाप्त होने जा रहा है। लेकिन सूत्रों की माने तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एन एन बोहरा के कार्यकाल को तीन महीने आगे बढ़ाये जाने की मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल बोहरा नहीं चाहते कि उनका कार्यकाल और बढे।

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