छापेमारी में नहीं मिला कैश, मीडिया ने बनाया रस्सी का सांप !

नई दिल्ली। कर्नाटक में जिस रिसॉर्ट में गुजरात के कांग्रेस विधायक रुकाये गए थे, उसी रिसॉर्ट के मालिक और कर्नाटक सरकार में ऊर्जा मंत्री शिवकुमार के ठिकानों पर हुई आयकर विभाग की छापेमारी के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि आयकर विभाग को दस करोड़ रुपये की नगदी मिली है।

वहीँ सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे दस्तावेजों की माने तो छापेमारी में कोई नगदी बरामद नहीं हुई है बल्कि मीडिया ने आयकर विभाग की छापेमारी को रस्सी का सांप बनाकर पेश किया है। वहीं शिवकुमार के भाई डीके सुरेश का कहना है कि हमारे 70 ठिकानों पर छापेमारी में मिली जिस संपत्ति और कैश की बात कही जा रही है वह शिवकुमार और उनके परिवार का नहीं है।

इस पूरी कार्रवाई को डीके सुरेश ने राजनीति साजिश करार देते हुए कहा कि ‘हमें सीनियर लीडर्स का इस मुद्दे पर पूरा साथ मिल रहा है और उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि वह हमारे साथ हैं और यह गहरी राजनीतिक साजिश है।’

सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे आयकर विभाग के दस्तावेजों में छापेमारी के दौरान मिले कैश इत्यादि का कॉलम खाली रखा गया है। इसमें किसी तरह की नगदी मिलने का उल्लेख नहीं है। इतना ही नहीं इन दस्तावेजों में किसी बेनामी सम्प्पति या किसी सम्पत्ति को सीज करने का उल्लेख भी नहीं है।

हालाँकि मीडिया ने कर्नाटक में हुई छापेमारी को ब्रेकिंग बनाकर कई दिनों तक चलाया और दावा किया कि कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री के ठिकानो से दस करोड़ से अधिक की नगदी मिली और करोडो रुपये की बेनामी सम्पत्ति का खुलासा भी हुआ है।

फिलहाल आयकर विभाग की तरफ से ऐसा कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है जिसके आधार पर सोशल मीडिया पर शेयर किये गए आयकर विभाग के दस्तावेजों के फर्जी या गलत होने की पुष्टि की जा सके।

 

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