चुनाव परिणाम से पहले ईवीएम मामले में 22 पार्टियों के नेता पहुंचे चुनाव आयोग

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव परिणाम आने से पहले विपक्ष की 22 पार्टियो ने आज फिर ईवीएम मामले में चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया। विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग से मांग की कि यदि किसी पोलिंग बूथ में ईवीएम और वीवीपैट का सही मिलान न हो तो पूरे विधानसभा क्षेत्र में दोबारा गिनती की जाए।

चुनाव आयोग को दिए गए ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि पांच पोलिंग बूथ के वीवीपैट पर्चियों का मिलान वोटों की गिनती से पहले किया जाए, न कि आखिरी राउंड की गिनती के बाद। अगर वीवीपैट मिलान गलत निकलता है तो उस विधानसभा क्षेत्र की सभी वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाना चाहिए।

इससे पहले आज दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आज विपक्ष के नेताओं की एक बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस की ओर से गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, वामपंथी दलों से सीताराम येचुरी टीएमसी से डेरेक ओ ब्रायन, आप से अरविंद केजरीवाल, सपा से रामगोपाल यादव, राजद से मनोज झा, डीएमके से कनिमोझी जैसे नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक के बाद सभी नेता ईवीएम और वीवीपैट पर अपनी चिंता को लेकर चुनाव आयोग से मिलने पहुंचे।

गौरतलब है कि एग्जिट पोल आने के बाद से ही ईवीएम पर सवाल उठाने लगे थे। विपक्षी दलों में किसी ने ईवीएम वीवीपैट मिलान में गलती पर उस क्षेत्र का चुनाव ही रद्द करने की बात कही तो किसी नेता ने कहा कि ईवीएम में घपले की कोशिश हो रही है।

सोमवार को टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कई नेताओं से मुलाकात की थी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मीटिंग की थी। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मिलने के लिए कोलकाता भी पहुंचे थे। 19 मई को मतदान खत्म होने के बाद से ही वह विपक्षी नेताओं से लगातार बैठक कर रहे हैं।

इस बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी चुनाव आयोग को ईवीएम को लेकर नसीहत दी है। प्रणब मुखर्जी ने बयान जारी करते हुए कहा- इस मामले में संस्थागत अखंडता (ईवीएम की सुरक्षा) सुनिश्चित करने का दायित्व चुनाव आयोग के पास है। उन्हें अवश्य ऐसा करना चाहिए और सभी अटकलों पर विराम लगाना चाहिए।

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