चुनाव आयोग के इस फैसले से बीजेपी को हो सकता है मलाल

नई दिल्ली। असम में एनआरसी मामले को लेकर जहाँ विपक्ष इसे चुनावी हथगण्डा बता रहा है वहीँ इस बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि एनआरसी में भले ही 40 लाख लोगों के नाम गायब हों लेकिन इसके बावजूद वे भारतीय मतदाता रहेंगे।

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि जिन लोगों का नाम भले ही एनआरसी की सूची में नहीं है, उनका वोटिंग का अध‍िकार अपने आप खत्म नहीं होगा क्योंकि ये अधिकार चुनाव कानून के तहत उन्हें मिला है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि यह एनआरसी का एक मसौदा है. इन 40 लाख लोगों को इस‍ लिस्ट में क्यों शामिल नहीं किया गया है, इसके बारे में अगले महीने पता चलेगा। इसके बाद ये लोग अपनी आपत्त‍ियां दर्ज करवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि एनआरसी की फाइनल लिस्ट जारी की जाएगी।

ओपी रावत ने बताया कि असम के मुख्य चुनाव आयुक्त आने वाले दिनों में तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपेंगे। इस रिपोर्ट में एनआरसी को लेकर तस्वीर साफ की जाएगी। इसमें इसके विभ‍िन्न पहलुओं पर नजर दौड़ाई जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि एनआरसी से बाहर किए गए लोगों को असम के इलेक्ट्रोरल रोल से हटाया नहीं जाएगा। क्योंकि ये जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत 3 भागों में शासित है।

उन्होंने बताया कि इन नागरिकों को रजिस्ट्रेशन ऑफ‍िसर्स के सामने ये सुन‍िश्च‍ित करना होगा कि वे भारत के नागरिक हैं। इससे जुड़े दस्तावेज भी उन्हें दिखाने होंगे। तब ही वे वोटर लिस्ट में बने रह सकेंगे।

इससे पहले विपक्ष ने यह आरोप लगाया था कि असम की बीजेपी सरकार ने चुनावी दृष्टि से साजिश के तहत लोगों के नाम गायब किये हैं। विपक्ष का आरोप है कि कई दशकों से रह रहे लोगों के नाम भी जानबूझ कर गायब किये गए हैं।

फ़िलहाल देखना है कि एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट के बाद सरकार का एनआरसी लागू करने के लिए क्या रुख रहता है। हालाँकि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से दो दो हाथ करने को तैयार दिख रहा है।

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