गैर बीजेपी दल कर रहे विचार, अगला चुनाव वैलेट पेपर से कराने की मांग पर लग सकती है मुहर

नई दिल्ली। ईवीएम को लेकर राजनैतिक दल अभी भी पूर्णतः संतुष्ट नहीं हैं। हालाँकि चुनाव आयोग दावे करता रहा है कि ईवीएम से किसी तरह की छेड़छाड़ सम्भव नहीं इसके बावजूद हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावो और गुजरात विधानसभा चुनाव में ईवीएम का बटन दबाने पर बीजेपी को वोट जाने की शिकायतें सामने आयी थीं।

उत्तर प्रदेश निकाय चुनावो में जहाँ जहाँ ईवीएम की जगह वैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ वहां बीजेपी की पराजय अथवा ख़राब प्रदर्शन ने विपक्ष के शक को और गहरा कर दिया है।

पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि प्रदेश में हाल ही में हुये निकाय चुनाव में जहां मतपत्रों से मतदान हुआ, वहां भाजपा के प्रत्याशियों को कम वोट मिले थे। लिहाजा पार्टी को शक है कि बीजेपी कहीं न कहीं ईवीएम में हेरफेर कर रही है। ऐसे में समाजवादी पार्टी अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर लोकसभा उपचुनाव बैलेट पेपर पर कराने की पहल करेगा।

वहीँ कांग्रेस के अंदर भी इस बात को लेकर मंत्रणा चल रही है कि क्या ईवीएम से कोई छेड़छाड़ सम्भव है अथवा नहीं। बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग कहता है ईवीएम से छेड़छाड़ सम्भव नहीं फिर मतदाता ईवीएम से गलत वोट जाने की शिकायत क्यों करते हैं।

कांग्रेस सूत्रों की माने तो ईवीएम की जगह वैलेट पेपर पर चुनाव कराये जाने को लेकर कांग्रेस में एक राय नहीं है लेकिन अधिकांश लोगों की राय में ईवीएम के चलते बीजेपी को फायदा हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक राजस्थान के अजमेर और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, फूलपुर संसदीय क्षेत्र में होने वाले लोकसभा के उपचुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस गंभीरता से ईवीएम और वैलेट पेपर से चुनाव कराने को लेकर गंभीरता से आंकलन करेगी।

वहीं ईवीएम को लेकर समाजवादी पार्टी के साथ साथ बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी, जदयू के बागी सांसद शरद यादव, राष्ट्रीय जनता दल, बाम दलो और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की पहले से एक राय है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पहले से ईवीएम की जगह वैलेट पेपर से चुनाव कराये जाने की मांग करते रहे हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद ईवीएम के खिलाफ सबसे पहले आवाज़ बहुजन समाज पार्टी ने ही उठायी थी। विधानसभा चुनावो के परिणाम के बाद बसपा सुप्रीमो ने ईवीएम में हेराफेरी किये जाने के आरोप लगाते हुए फिर से वैलेट पेपर पर चुनाव कराने की चुनौती दी थी।

आम आदमी पार्टी भी लगातार ईवीएम को लेकर मोदी सरकार और बीजेपी पर हमले बोलती रही है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा में ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावना को लेकर एक डेमो भी दिया था। जिसमे दावा किया गया था कि ईवीएम से छेड़छाड़ की जा सकती है।

सूत्रों की माने तो जल्द ही ईवीएम को लेकर विपक्ष एकजुट होकर चुनाव आयोग से भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराये जाने की मांग कर सकता है। हालाँकि कांग्रेस इसके लिए अभी तैयार नहीं दिख रही लेकिन विपक्ष की एकता को बनाये रखने के लिए कांग्रेस का इस मामले में आगे आना तय है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की माने तो पार्टी गुजरात में हारी नहीं बल्कि ईवीएम के ज़रिये हरायी गयी। ऐसे में पार्टी को सोचना ही होगा क्यों कि इस वर्ष कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं और बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के इरादों को चकनाचूर करने के लिए ज़रूरी है कि चुनाव वैलेट पेपर से हों। कांग्रेस नेता ने कहा कि भले ही अब ईवीएम से वीवीपैट मशीन लगी है लेकिन चुनाव आयोग हर बूथ पर वीवीपैट पेपर ट्रेल की पर्चियों को ईवीएम से मिलान को तैयार क्यों नहीं है ? ये ईवीएम को लेकर शक को और गहरा करता है।

फ़िलहाल देखना है कि वैलेट पेपर से चुनाव कराये जाने की मांग को लेकर विपक्ष में कब सहमति बन पाती है लेकिन इतना तय है कि जल्द ही विपक्ष इस मामले को लेकर चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटा सकता है।

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