गुमशुदगी के दो साल बाद भी वही सवाल: कहाँ है नजीब ?

ब्यूरो (राजाज़ैद ) । दिल्ली की प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से 15 अक्टूबर 2016 को लापता हुए छात्र नजीब अहमद का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

नजीब अहमद को तलाशने का काम सीबीआई को भी सौंपा गया लेकिन अंततः सीबीआई ने भी मामले से हाथ उठाते हुए कोर्ट से इस केस को बंद करने की अनुमति मांगी थी और आज दो साल बीत जाने के बाद भी एक सवाल जस का तस बना हुआ है कि नजीब आखिर कहाँ चला गया ?

सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि अगर इस मामले में आगे कोई इनपुट या सूचना मिलती है तो उस मामले की भी जानकारी कोर्ट को देकर सीबीआई जांच कर सकती है।लेकिन इस मामले में कोई इनपुट या सूचना नहीं मिली है।

सीबीआई ने हाईकोर्ट को बताया कि नजीब को तलाशने के लिए हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली में काफी तफ्तीश की गई तथा कई राज्यों के डीजीपी को भी इस बारे में मदद के लिए खत लिखा गया था।

अब इस मामले में अब 29 नवंबर को अहम सुनवाई होगी। इस सुनवाई के दौरान क्लोजर रिपोर्ट पर संज्ञान लिया जाएगा। गौरतलब है कि सीबीआई ने पिछले साल 16 मई को मामले में जांच शुरू की थी।

वहीँ लापता छात्र नजीब अहमद की मां फातिमा नफीस का कहना है कि ‘सीबीआई जिस तरह के तर्क दे रही है वह एक मज़ाक जैसा है। उन्होंने कहा कि सीबीआई का तर्क है कि आरोपियों से बरामद मोबाइल में से कुछ खराब हैं, कुछ में डाटा नहीं मिला है और कुछ के पैटर्न लॉक नहीं खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्या सीबीआई मोबाईल का लॉक नहीं खोल सकती ?

फातिमा नफीस का ये भी कहना है कि नजीब की गुमशुदगी को लेकर न तो दिल्ली पुलिस ने गंभीरता दिखाई और न ही सीबीआई ने। यदि आरोपियों को हिरासत में रखकर पूछताछ की जाती तो शायद बहुत कुछ सामने आगया होता। उन्होंने कहा कि आरोपियों का नारकोटिक टेस्ट क्यों नहीं कराया गया।

फिलहाल लापता छात्र नजीब की मां ने हिम्मत नहीं हारी है। उनका कहना है कि वे अपने बेटे की तलाश के लिए हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। भले ही उन्हें कोई मदद करे या न करे, वे कानून के रास्ते पर पूरी हिम्मत से डटी रहेंगी।

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