गुजरात में हार कर भी जीते राहुल, मोदी जीत कर भी हारे

नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव के रुझानों पर यदि प्रथम दृष्टया कोई टिप्पणी दी जा सकती है तो वह यही है कि राहुल गांधी हार कर भी जीते हैं वहीँ पीएम मोदी जीत कर भी हार गए हैं।

सबसे अहम बात यह है कि भले ही सीटों में कांग्रेस बीजेपी से पिछड़ गयी हो लेकिन पिछले चुनाव के मुकाबले वोट प्रतिशत में कांग्रेस का ग्राफ ऊपर गया है। जानकारों की माने तो राज्य में सत्ता बनाने के करीब पहुँच चुकी बीजेपी के लिए वोट प्रतिशत गिरना भविष्य में आने वाले बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है।

गुजरात विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 150 सीटों का दावा कर रही थी। वह कहीं न कहीं 110 से भी कम पर सिमटती दिख रही है। हालाँकि अभी रुझान हैं नतीजे आने तक फेरबदल सम्भव है लेकिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के 150 सीटों तक पहुंचना अब ना मुमकिन हो गया है।

बीजेपी इतनी सीटें जीतने में तब कामयाब हो पायी है जब उसे पाटीदार फेक्टर से कोई बड़ा नुक्सान नहीं हुआ है लेकिन इसके बावजूद वह पिछले चुनावो में मिली सीटों की संख्या तक पहुँचने में असफल दिख रही है।

वहीँ कांग्रेस को कम से कम दस से बारह सीटों का फायदा होता दिख रहा है। सीटों और मत प्रतिशत में बढ़ोत्तरी को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बड़ी जीत माना जा रहा है। खासकर गुजरात में जहाँ कांग्रेस 22 सालो से सत्ता में नहीं है, वहां मत प्रतिशत और सीटों का बढ़ना कांग्रेस के लिए सुखद संकेत हैं।

एक अहम बात यह भी है कि बीजेपी पीएम मोदी के जिस करिश्मे को भुनाना चाहती थी उसे उतनी सफलता नहीं मिली है। वहीँ कांग्रेस पिछले चुनाव में मिली सीटों में से अधिकांश सीटों को बचाने में सफल रही है। खबर लिखे जाने तक बीजेपी 102, कांग्रेस 76 तथा अन्य 4 सीटों पर आगे चल रहे थे।

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