गुजरात के पाटीदारो की तरह राजस्थान में इस संगठन ने किया बीजेपी की नाक में दम

नई दिल्ली। गुजरात में पाटीदारो की नाराज़गी के चलते लड़खड़ा कर गुजरात की सत्ता तक पहुंची भारतीय जनता पार्टी के लिए राजस्थान में उसके अपनों के अलावा एक और संगठन ने पाटीदारो की तरह नाक में दम कर रखा है।

राजस्थान में दो लोकसभा सीटों अजमेर और अलवर तथा मांडलगढ़ विधानसभा सीट के लिए 29 जनवरी को उपचुनाव होना है। अजमेर सीट पर बीजेपी अभी एक अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। राजस्थान में राज्य सरकार के पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक घनश्याम तिवाड़ी और उनके समर्थक पहले से ही बीजेपी की राह का रोड़ा बने हुए हैं।

वहीँ दूसरी तरफ राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ नामक संगठन ने चुनाव लड़ने के एलान से वसुंधरा सरकार और बीजेपी नेताओं की नींद उड़ा दी है। राज्य में बेरोज़गारी के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने वाले राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के पदाधिकारी कभी बीजेपी नेताओं के करीबी हुआ करते थे और पिछले कई चुनावो में बीजेपी का समर्थन करते रहे हैं।

इस बार राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने उपचुनाव वाले लोकसभा की दोनो सीटों और विधानसभा सभा की एक सीट पर अपने प्रत्याशियों का एलान कर बीजेपी के लिए नई मुश्किल पैदा कर दी है।

सूत्रों की माने तो तीन सीटों पर राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने अपने उम्मीदवार तय कर लिए हैं। महासंघ सूत्रों के अनुसार संगठन के निशाने पर भारतीय जनता पार्टी और वसुंधरा राजे सरकार की नीतियाँ हैं।

सूत्रों ने कहा कि राज्य में राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ का बड़ा नेटवर्क है। ऐसे में ये सन्देश निचले स्तर तक दे दिया गया है कि संगठन से जुड़े लोग बीजेपी को हराने के लिए अपने अपने क्षेत्रो में काम करें। सूत्रों ने कहा कि चुनाव से पहले आसपास के सभी कार्यकर्ताओं और संगठन के सदस्यों को अपने नजदीक की लोकसभा या विधानसभा सीट पर पहुँच कर बीजेपी के खिलाफ प्रचार करने के निर्देश जारी किये गए हैं।

गौरतलब है कि अगले वर्ष 2018 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। उपचुनाव में सभी सीटों पर वापसी करना वसुंधरा राजे सरकार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। वहीँ गुजरात चुनावो में अच्छे परिणामो से जोश में आयी कांग्रेस तीनो सीटों पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ने के मूड में दिखाई दे रही है।

इस बार चुनावो में बीजेपी के सामने कांग्रेस के अलावा उसके अपने विरोधियों से भीतरघात से निपटने के अलावा राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ से निपटना भी एक बड़ी चुनौती है।

सूत्रों ने कहा कि बेरोज़गारी के मुद्दे पर वसुंधरा सरकार के खिलाफ युवाओं में खासी नाराज़गी है वहीँ किसान भी राज्य सरकार से नाराज़ बताये जाते हैं। इसके अलावा राज्य में सरकार विरोधी हवा भी बीजेपी के लिए एक बड़ी मुश्किल साबित हो सकता है। फिलहाल बीजेपी चिंतन कर रही है कि जातीय आंकड़ों के हिसाब से किसे उम्मीदवार बनाया जाये जिससे सरकार विरोधी हवा के बावजूद भी पार्टी जातिगत आंकड़ों के सहारे चुनावी नैया पार कर सके।

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