गहराई से पढ़िए: जम्मू कश्मीर बनने से अब तक, कब क्या हुआ

नई दिल्ली। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सुर्ख़ियों में आये जम्मू कश्मीर के बारे में कई बातें ऐसी हैं जिन्हे सम्भवतः हर व्यक्ति नहीं जानता। जम्मू कश्मीर भारत में कैसे विलय हुआ और राज्य में धारा 370 कैसे जोड़ी गयी, इसके पीछे कई अहम कारण छिपे हैं।

आज़ादी से पहले जम्मू कश्मीर एक रियासत हुआ करता था जिसे अंग्रेजो से ख़रीदा गया था। आज़ादी के बाद जम्मू कश्मीर के पास दो विकल्प थे, या तो स्वतंत्र राष्ट्र रहे या भारत में विलय हो जाए। लेकिन उस समय जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने स्वतंत्र राष्ट्र रहने का विकल्प चुना।

लेकिन पाकिस्तानी कबीलियाई लोगों की लगातार अवैध घुसपैठ और जोर ज़बरदस्ती के आगे महाराजा हरि सिंह के सुरक्षा बदोबस्त हलके साबित हुए और उन्होंने भारत से मदद मांगी। इस पर भारत ने उन्हें विलय का प्रस्ताव दिया और जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया।

जम्मू कश्मीर में कब क्या हुआ :

1847: डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने अमृतसर संधि के तहत ईस्ट इंडिया कम्पनी से जम्मू कश्मीर क्षेत्र को ख़रीदा

1930: जम्मू कश्मीर की पहली राजनैतिक पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस का उदय हुआ। कश्मीरी मुसलमान जम्मू कश्मीर के तत्कालीन शासक महाराजा हरि सिंह की नीतियों से खुश नहीं थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस के फाउंडर शेख अब्दुल्ला ने महाराजा हरि सिंह के खिलाफ बिगुल फूंका और कश्मीर छोड़ो आंदोलन शुरू किया।

1947: भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से आज़ादी मिलने के साथ ही जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर की रियासतों को भारत में शामिल होने या स्वतंत्र राष्ट्र रहने के विकल्प दिए गए। जम्मू कश्मीर के महाराज हरि सिंह ने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया और स्वतंत्र राष्ट्र बनने का विकल्प चुना।

1947: पाकिस्तानी काबाइलियों की जम्मू कश्मीर में बढ़ती घुसपैठ से महाराजा हरि सिंह परेशान हो चुके थे। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल से मदद मांगी। इस पर भारत की तरफ से उन्हें जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की पेशकश की गयी। जिससे रक्षा और विदेश मामलो पर भारत का नियंत्रण रह सके।

1947: महाराजा हरि सिंह और भारत के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इसके बाद भारत ने जम्मू कश्मीर में अपनी सेना तैनात कर दी। अब जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा हो चूका था।

1948: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान के अनधिकृत कब्ज़े का मुद्दे उठाया। इस पर संयुक्त राष्ट्र ने जनमत संग्रह कराये जाने का सुझाव दिया। जम्मू कश्मीर से दोनों देश अपनी अपनी सेनाएं हटाने के लिए तैयार नहीं हुए और विवाद बढ़ना शुरू हो गया।

1949: नेशनल कॉन्फ्रेंस के फाउंडर शेख अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के लिए विशेष राज्य के दर्जे वाले अनुच्छेद 370 के लिए प्रयास शुरू किये और वे कई बार चर्चा में शामिल हुए।

1950: जम्मू कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा मिला।

1952: राज्य और संघ के बीच रिश्तो की व्याख्या की गयी।

1956: जम्मू कश्मीर को अपना अलग संविधान मिला और राज्य ने खुद को भारत का अभिन्न अंग स्वीकार किया।

1972: पाकिस्तान और भारत के बीच शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते में संघर्ष विराम की जगह को लाइन ऑफ कंट्रोल माना गया।

1975: शेख अब्दुल्ला और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बीच अनुच्छेद 370 को पुनः महत्व देते हुए समझौते पर हस्ताक्षर किये गए।

1990: जम्मू कश्मीर में चरमपंथियों ने सिर उठाना शुरू कर दिया। घाटी में बढ़ते आतंक के बीच कश्मीरी पंडितो को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।

1995: तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिंहराव ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 बने रहने का आश्वासन दिया।

2015: बीजेपी और पीडीपी ने जम्मू कश्मीर में संयुक्त सरकार बनाई।

2018: बीजेपी ने पीडीपी से नाता तोडा, महबूबा मुफ़्ती ने इस्तीफा दिया, राज्यपाल शासन लगा और कुछ महीनो बाद राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

2019: केंद्र की एनडीए सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का प्रस्ताव दिया।

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