खड़के बोले ‘सरकार ने सुप्रीमकोर्ट से बोला झूठ, अब पीएसी करेगी सीएजी को तलब’

नई दिल्ली। राफेल डील पर सुप्रीमकोर्ट के कल आये फैसले के बाद कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे को घेरने की कोशिश में जुटे हैं। कल कोर्ट का फैसला आने के बाद जहाँ बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष से माफ़ी मांगने की मांग की वहीँ पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आक्रामक रुख दिखाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी और पीएम मोदी पर सीधे हमले किये।

अब कांग्रेस सांसद और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कैग रिपोर्ट के तौर पर गलत जानकारी रखी, जिस वजह से राफेल डील पर इस तरह का निर्णय आया है।

खड़गे ने कहा कि वह पीएसी के सदस्यों से आग्रह करेंगे कि अटॉर्नी जनरल और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को बुलाकर पूछा जाए कि राफेल मामले में कैग की रिपोर्ट कब और कहां आई है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़के ने कहा कि ‘राफेल के बारे में कोर्ट के सामने सरकार को जिन चीजों को ठीक ढंग से रखना चाहिए था, वह नहीं रखा। अटॉर्नी जनरल ने इस तरह से पक्ष रखा कि कोर्ट को यह महसूस हुआ कि कैग रिपोर्ट संसद में पेश हो गई है और पीएसी ने रिपोर्ट ने देख ली है।’

खड़के ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट को सरकार की तरफ से जैसा बताया गया, कोर्ट ने उन्ही तथ्यों के आधार पर फैसला दे दिया लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार ने कोर्ट को भी गुमराह किया और गलत जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि जब पीएसी जांच करती है तो साक्ष्यों को देखती है लेकिन न्यायालय को गलत जानकारी दी गई और जिसके आधार पर गलत निर्णय आया।

खड़गे ने कहा, ‘पीएसी के सदस्यों से आग्रह करने जा रहा हूं कि अटॉर्नी जनरल को बुलाया जाए और कैग को भी बुलाया जाए ताकि यह पूछा जाए कि यह रिपोर्ट कब आई और पीएसी को कब मिली है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर यह रिपोर्ट नहीं आई तो सरकार ने झूठ क्यों बोला? वह माफी मांगे। सरकार को कहां से क्लीन चिट मिलती है? किसी चीज को धोखे में रखकर की जाए तो वो ठीक नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए हम जेपीसी की मांग कर रहे हैं ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।

फिलहाल देखना है कि राफेल मामले में अब विपक्ष सरकार को संसद और सड़क पर घेरने के लिए क्या नई रणनीति बनाता है। इससे पहले कल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राफेल डील पर जेपीसी जांच की मांग की थी।

उन्होंने कहा था कि हम इसे साबित करके रहेंगे कि राफेल डील में भारी अनियमितताएं हैं और अनिल अम्बानी को फायदा पहुंचाने के लिए डील में बदलाव किया गया है।

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