महाभियोग: खुद को जज तो नही समझ रहे उपराष्ट्रपति: सिब्बल

नई दिल्ली। कांग्रेस सहित सात राजनैतिक दलों द्वारा मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ पेश महाभियोग प्रस्ताव को भले ही उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ख़ारिज कर दिया हो लेकिन विपक्ष इस पर कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है।

कांग्रेस नेता और प्रसिद्द अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आजतक से बातचीत में कहा कि इस प्रस्ताव पर विभिन्न दलों के सांसदों के साइन करीब एक महीना पहले ही ले लिए गए थे। इसका लोया केस में आए फैसले से कुछ लेना-देना नहीं है। यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी।

सिब्बल ने कहा कि मोदी सरकार न्यायपालिका पर कब्जा करने की कोशिश में है। उन्होंने कहा कि केसों के बंटवारे में पक्षपात का आरोप सुप्रीम कोर्ट के ही चार जजों ने लगाया है, कांग्रेस पार्टी ने नहीं।

सिब्बल ने कहा कि दीपक मिश्रा को अपनी अंतररात्मा की आवाज सुननी चाहिए तब कोई फैसला करना चाहिए। हम चाहते हैं कि गंगोत्री पवित्र और न्यायपालिका साफ हो।

कपिल सिब्बल ने कहा कि इतिहास में ऐसा कभी देखने को नहीं मिला, सभी मामलों में जांच की गई। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति को सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव में गिनाई गई वजहों पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए था।

सिब्बल ने कहा कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को जांच के लिए समिति गठित करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा करने की जगह महाभियोग प्रस्ताव को रद्द कर दिया।

कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा प्रस्ताव को रद्द किये जाने पर सवाल उठाते हुये कहा कि क्या वह (वेंकैया नायडू) खुद को न्यायिक संस्था मानते हैं, अगर ऐसा है तो वह गलत हैं। वह जज नहीं हैं, वह उच्च पद पर आसीन हैं, मैं उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाना चाहता हूं।

कपिल सिब्बल ने कहा कि वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे. उन्होंने दोहराया कि इस मामले में जजों की कमेटी के स्तर से जांच होनी चाहिए। सिब्बल ने एक बार फिर डोहराया कि वह मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का बहिष्कार जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि वह उन केसों में पेश नहीं होंगे जिनकी सुनवाई सीजेआई दीपक मिश्रा करेंगे।

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