क्षेत्रीय नेताओं को साइड में रख कांग्रेस आलाकमान के दूत करेंगे बसपा सुप्रीमो से बातचीत

नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस से गठबंधन न होने पाने का ठीकरा कांग्रेस नेताओं पर फोड़ने के बाद हरकत में आयी कांग्रेस ने तय किया है कि गठबंधन के मुद्दे पर पार्टी के चुनिंदा लोग ही बसपा के साथ बातचीत करेंगे।

हालाँकि दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी राजस्थान और मध्य प्रदेश में अकेले दम पर चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी है वहीँ छत्तीसगढ़ में बसपा ने अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस से गठबंधन किया है।

फ़िलहाल कांग्रेस ने गठबंधन को लेकर बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए मायावती को सकारत्मक रुख दिखाया है। सूत्रों की माने तो यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बसपा से गठबंधन में अपनी रूचि दिखाई है। कल आये मायावती के बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के प्रभारियों से गठबंधन की संभावनाओं को लेकर बात की है।

सूत्रों के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनावो में बसपा को साथ लेकर चलने का मन बना चुकी कांग्रेस ने अब तय किया है कि राज्यों में गठबंधन को लेकर पार्टी के कुछ चुनिंदा लोग ही विपक्षी दलों से बात करेंगे। साथ ही गठबंधन को लेकर बातचीत में किसी क्षेत्रीय नेता को न तो बातचीत में शामिल किया जाएगा और न ही वे मीडिया में किसी तरह का बयान देने के लिए अधिकृत होंगे।

जानकारों की माने तो चूँकि अभी गठबंधन की संभावनाओं वाले तीन राज्यों में विधानसभा चुनावो का एलान नहीं हुआ है इसलिए कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन को लेकर एक बार फिर बातचीत शुरू हो सकती है।

जानकारों के मुताबिक राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बसपा भले ही अधिक सीटें जीतने की स्थति में नहीं है लेकिन वह कई सीटों पर कांग्रेस का अंक गणित बिगाड़ने की ताकत रखती है। ऐसे में बसपा का अलग चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए अच्छी भविष्यवाणी नहीं होगी।

फिलहाल देखना है कि अगले सप्ताह की शुरआत होने के साथ ही बसपा कांग्रेस के बीच गठबंधन के कयास कितने सार्थक सिद्ध होते हैं। इतना तय माना जा रहा है कि यदि बसपा अकेले चुनाव लड़ती है तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा।

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