क्या विपक्ष को पता था “इस चुनाव में भी होगा ईवीएम से मैजिक”

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आने के बाद जहाँ बीजेपी इसे मोदी करिश्मा मानकर अपनी पीठ थपथपा रही है वहीँ कांग्रेस सहित विपक्ष में मातम, ख़ामोशी और सन्नाटा पसरा है।

जिस जादुई तरीके से बीजेपी जीती उसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की होगी। पूरे चुनाव के दौरान देश में कहीं भी मोदी हवा नाम की कोई चीज़ नहीं दिखाई दी लेकिन अचानक परिणामो में आयी मोदी लहर ने अच्छे अच्छो के दिमाग को हिला दिया।

सात चरणों के पूरे चुनाव पर नज़र डालें तो न तो किसी बीजेपी नेता ने ये दावा किया कि देश में बीजेपी के पक्ष में लहर चल रही है और न मीडिया को ही ज़मीन पर कोई लहर दिखाई दी फिर अचानक परिणामो में मोदी लहर कैसे पैदा हुई ये सवाल उठना लाजमी है।

जब परिणामो को लेकर ईवीएम पर संदेह ज़ाहिर किया जाता है तो बीजेपी उन राज्यों की बात करती हैं जहाँ के विधानसभा चुनाव में हाल ही में कांग्रेस ने सत्ता हासिल की है। पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका किस तरह की रही ये किसी से छिपा नहीं है। यहाँ तक कि चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर खुद चुनाव आयोग के अंदर दो राय पैदा हो गयीं।

हम यहाँ बात कयासों की नहीं बल्कि तथ्यों के आधार पर कर रहे हैं। जो लोग एनडीए की प्रचंड जीत को सच्चाई बता रहे है, उससे हम भी इंकार नहीं कर रहे लेकिन इस सच्चाई की परतें भी पलटना आवश्यक है। हो सकता है इस सच्चाई के अंदर एक और सच्चाई छिपी बैठी हो।

महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले कांग्रेस नेता अमीन शेख बताते हैं कि “मैंने वर्ष गुजरात चुनाव के बाद से कई केन्द्रीय मंत्री , सांसद , राज्य मंत्री , विधायक , सोशल मीडिया प्रभारी , जिला अध्यक्ष , सुप्रीम और हाई कोर्ट के वे वकील जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी और जिला समिति के पदाधिकारी हैं से कहा था ईवीएम मशीन को एक धोखा और फरेब बना दिया गया है ,, लेकिन मेरी बात सुनकर कुछ लोग अपने कान में उंगलियां घुमाने लगे , कुछ ने कहा ऐसा नहीं हो सकता, कुछ ने कहा वर्किंग कमेंटी में बात रखेंगे। लेकिन आज अधिकतर लोग मुझे फ़ोन पर कह रहे हैं आप ने सच कहा था। “

लोकसभा चुनाव के दौरान कुछ ऐसी संदिग्ध गतिविधियां भी सामने आयीं, जो शक पैदा करने वाली थीं लेकिन कांग्रेस, सपा, बसपा जैसे दलों की तरफ से इन गतिविधियों पर ख़ामोशी साधे रखने से मामला आगे नहीं बढ़ सका।

विपक्ष ने ईवीएम और वीवीपैट को लेकर कई बार चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया लेकिन हर बार उसे खाली हाथ वापस आना पड़ा। ईवीएम से वीवीपैट की सौ फीसदी पर्चियों के मिलान की विपक्ष की मांग पर चुनाव आयोग ने यह कहकर टरका दिया कि इससे मतगणना में चार पांच दिन की देरी हो सकती है। जब लोकसभा चुनाव 19 मई को सम्पन्न हो गए थे यदि मतगणना 4 दिन बाद 23 मई को हो सकती है तो क्या उसे और चार दिन नहीं टाला जा सकता ?

लोकसभा चुनाव के दौरान कई ऐसे वीडियो सामने आये जिनमे मतदाताओं को जबरन बीजेपी को वोट देने के लिए वाद्य किया गया। फरीदाबाद और पूर्वोत्तर की एक लोकसभा सीट पर जबरन ईवीएम का बटन दबाने, चंदौली में दलित मतदाताओं की उंगलियों पर जबरन स्याही लगाने, वाराणसी सीट से तेज बहादुर का नामांकन निरस्त होने की साजिश करने जैसे कई मामले सार्वजनिक हुए। इस सब के बावजूद चुनाव आयोग खामोश रहा।

चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद बसपा प्रमुख मायावती ने ईवीएम को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किये हैं। मायावती ने मीडिया से बातचीत में शुक्रवार को कहा कि जनता का विश्वास ईवीएम से हट चूका है। गठबंधन ने जो सीटें यूपी में जीती हैं वहां इन लोगों ने ईवीएम में गड़बड़ी नहीं कराई ताकि जनता को शक न हो। मायावती ने कहा कि जब विपक्ष लगातार ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराये जाने की मांग कर रहा है तो चुनाव आयोग को परेशानी क्यों है ?

चुनाव परिणाम आने के बाद अभी कांग्रेस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है लेकिन जल्द ही कांग्रेस भी ईवीएम को लेकर सवाल उठाने वाली है। पार्टी सूत्रों की माने पार्टी के रणनीतिकारों को चुनावी नतीजों पर यक़ीन नहीं हो रहा। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि ईवीएम से निकला वोट आया कहाँ से ?

फ़िलहाल देखना है कि कांग्रेस या अन्य विपक्षी दल चुनाव परिणामो पर मंथन करने के बाद क्या तय करते हैं और भविष्य में होने वाले चुनावो में ईवीएम से छुटकारा पाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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