क्या राहुल गांधी के भय से रात में ही समाप्त करा दिया गया “किसान आंदोलन” ?

नई दिल्ली(राजा ज़ैद) । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों के किसान अपनी मांगी के संदर्भ में किसान क्रांति यात्रा को लेकर दो अक्टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जन्मदिवस के दिन दिल्ली में प्रवेश कर किसान घाट पहुंचना चाहते थे।

किसानो का यह जत्था 23 सितंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार से रवाना हुआ था। किसानो का काफिला जैसे जैसे हरिद्वार से आगे बढ़ा, रास्ते के जिलों के किसान भी इस जत्थे से जुड़ते गए और गाज़ियाबाद आये आये किसानो की तादाद काफी हो गयी। सड़क पर दूर दूर तक किसान नज़र आने लगे।

हरिद्वार से लेकर गाज़ियाबाद तक रास्ते में किसी तरह की कोई हिंसा नहीं हुई। न किसानो ने किसी से कोई छेड़छाड़ की और न ही किसी को नुक्सान पहुँचाया। कुल मिलाकर गाज़ियाबाद तक किसान संघर्ष यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से पहुंची।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसान संघर्ष यात्रा के दिल्ली रवाना होने से पहले हिंडन के पास उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानो से बातचीत कर किसानो को आश्वासन देकर किसानो को मनाने और आंदोलन स्थगित कराने के प्रयास किये लेकिन किसानो और यूपी सरकार में बातचीत नहीं बनी।

इसके बाद किसानो ने अपना कार्यक्रम यथावत जारी रखते हुए दिल्ली की सीमा की तरफ कूंच करना शुरू किया। इसके बाद किसानो को पुलिस द्वारा दिल्ली की सीमा पर रोक दिया गया। इसके बाद पुलिस की बर्बरता शुरू हो गयी। पुलिस के लाठीचार्ज में कई किसान घायल भी हो गए। इस समय कांग्रेस अध्यक्ष महराष्ट्र के वर्धा में थे।

वर्धा में दो अक्टूबर के अवसर पर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक चल रही थी। पार्टी सूत्रों की माने तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को किसानो पर लाठीचार्ज की घटना की जानकारी मिल गयी थी।

यह वह समय था जब दो अक्टूबर के दिन किसानो पर लाठी चार्ज और पुलिस बर्बरता से सरकार की किरकिरी हो चुकी थी। इसके बाद सरकार की तरफ से डेमेज कंट्रोल शुरू किया गया। गृहमंत्री राजनाथ सिंह को आगे किया गया। इतना ही नहीं कुछ अन्य बीजेपी नेताओं को भी किसानो के ज़ख्मो पर मरहम लगाने वाले बयान देने के लिए कहा गया।

शाम होते होते किसान नेताओं की तरफ से एलान हुआ कि आंदोलन अगले दिन भी जारी रहेगा। इसलिए किसानो ने सड़क किनारे ही रुकने का फैसला किया और जिसे जहाँ जगह मिली वहां सो गया।

देर शाम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी वर्धा से वापस दिल्ली पहुँच चुके थे। पार्टी सूत्रों की माने तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अगले दिन दिल्ली यूपी सीमा पर रुके आंदोलनकारी किसानो से मिलने जाने वाले थे।

सूत्रों की माने तो बीजेपी नेताओं को यह भनक लग चुकी थी कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अगले दिन दिल्ली यूपी बॉर्डर पर किसानो से मिलने जा रहे हैं। इसलिए देर रात में यूपी के दो बीजेपी नेताओं द्वारा कुछ किसान नेताओं पर एक केंद्रीय मंत्री से बात करने का दबाव बनाया गया। सूत्रों के मुताबिक किसान नेताओं पर आंदोलन रात में समाप्त कर किसानो को वापस भेजे जाने के लिए भी कहा गया।

अहम वजह यह थी कि कहीं अगले दिन राहुल गांधी मौके पर पहुंचकर किसानो को गले न लगा लें। यदि किसी तरह राहुल शाम को ही किसानो तक पहुँचने में सफल रहते तो किसान आंदोलन की दिशा और दशा बदल सकती थी और सरकार को एक और नई मुश्किल झेलनी पड़ सकती थी।

लेकिन ऐसा होने से पहले ही किसान आंदोलन के समाप्त होने की घोषणा कराकर किसानो को सुबह होने से पहले रवाना करा दिया गया। सुबह होते होते किसानो की तादाद चौथाई से भी कम रह गयी। साथ ही किसानो को नेतृत्व दे रहे वे नेता जो केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करने दिल्ली आये थे, वे भी मौके से गायब हो गए।

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