क्या बीजेपी पर टूटने वाला है मुश्किलों का पहाड़ ?

नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। भले ही बीजेपी ने राज्य सभा चुनावो में अच्छा प्रदर्शन किया हो लेकिन बीते 6 महीनो का लेखा जोखा देखा जाए तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ी हैं।

राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी की किरकिरी होने के बाद उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर और बिहार की अररिया सीट पर बीजेपी को मिली पराजय से उसकी नींद टूट गयी है।

जानकारों की माने तो पिछले 6 महीनो में बीजेपी की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से नीचे आया है। मोदी सरकार के प्रदर्शन को छोड़ भी दें तब भी एनडीए के सहयोगी दलों में बीजेपी को लेकर बढ़ती नाराज़गी के बाद सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस कहीं न कहीं बीजेपी के लिए भविष्य के खतरे के सूचक हैं।

विधानसभा चुनावो में कई राज्यों की सत्ता पर कब्ज़े के बाद खुद को अपराजेय मान चुकी बीजेपी के लिए असल इम्तेहान का समय अब आया है। देश में लोकपाल और किसानो की दुर्दशा जैसे मुद्दों को लेकर प्रमुख समाज सेवी अन्ना हज़ारे दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे हैं। पिछले तीन दिनों में अन्ना हज़ारे का तीन किलो बजन कम हो गया है।

हालाँकि अन्ना के अनशन में इस बार भीड़ नहीं जुट रही इसलिए मोदी सरकार पर बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव नहीं बन रहा लेकिन देर सबेर ही सही अन्ना हज़ारे सरकार पर दबाव बनाने का रास्ता ढूंढ ही लेंगे।

वहीँ दूसरी तरफ कभी पीएम मोदी के खास रहे विश्व हिन्दू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया पूरे देश में राम मंदिर को लेकर बीजेपी का पोल खोल अभियान शुरू करने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रवीण तोगड़िया जल्द ही अपने अभियान की तारीखों का एलान करेंगे।

प्रवीण तोगड़िया ने हाल ही में बीजेपी पर राम मंदिर के नाम पर हिन्दू समुदाय के लोगों को भ्रमित करने और राम मंदिर मुद्दे का राजनैतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं तोगड़िया ने कहा था कि यदि तीन तलाक के लिए कानून बनाया जा सकता है तो राम मंदिर के लिए कानून बनाने के लिए मोदी सरकार ने पहल क्यों नहीं की।

सूत्रों की माने तो तोगड़िया जल्द ही राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर हिन्दुओं का हृदय जागरण करने के लिए अभियान शुरू करने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक तोगड़िया देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं को बताएँगे कि किस तरह बीजेपी ने हिन्दू समुदाय की आस्था का राजनैतिक फायदा उठाया है।

तोगड़िया कहते कि बीजेपी चुनाव से पहले राम मंदिर निर्माण, धारा 370, कॉमन सिविल कोड की बात करती है और हिन्दू समुदाय के वोट ले लेती हैं लेकिन सत्ता में आते ही उसके सुर बदल जाते हैं।

भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें यहीं समाप्त नहीं होती दिखायी दे रहीं क्यों कि जल्द ही कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी पूरी ताकत अवश्य झोंकेगी लेकिन सूत्रों की माने तो गुजरात की तरह कर्नाटक में भी विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया बीजेपी के खिलाफ अभियान छेड़ने को तैयार बैठे हैं।

वहीँ बीजेपी के लिए एक बड़ी मुश्किल यह भी पैदा हो सकती है कि यदि पार्टी कर्नाटक में चुनाव हारती है तो उस पर एनडीए के घटक दल हावी हो सकते हैं। बिहार के भागलपुर में हुए दंगे के बाद बीजेपी नेताओं के बयान से खफा नितीश कुमार ने तो इस मामले में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से बात करने का एलान भी कर दिया है।

आंध्र प्रदेश में टीडीपी की तरह ही बिहार में जेडीयू नेताओं को बीजेपी नेताओं का बड़बोलापन रास नहीं आ रहा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों गिरिराज सिंह और अश्वनी चौबे द्वारा दिए गए हाल के बयानों से खुश नहीं हैं।

जदयू सूत्रों के अनुसार बीजेपी नेताओं के बयान से सरकार की छवि खराब हो रही है। सूत्रों के मुताबिक मुस्लिम बाहुल्य इलाको से जीतकर आये जदयू के विधायकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस मामले में सख्त रुख दिखाने की मांग की है।

यदि नीतीश कुमार ने भी एन चुनावो से पहले बीजेपी से अपना दामन छुड़ा लिया तो भले ही नीतीश कुमार की सरकार गिर जायेगी लेकिन लोकसभा चुनाव में बीजेपी की राह भी और मुश्किल हो जाएगी।

वहीँ दूसरी तरफ बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आज़ाद और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा पाला बदलने को तैयार बैठे हैं। इन तीनो नेताओं का बिहार- झारखंड की राजनीति में अच्छा प्रभाव है।

फिलहाल यह तय है कि बीजेपी पर मुसीबतो का पहाड़ टूटने के कगार पर है। राज्य सभा चुनाव में सीट जीतने का मतलब यह कतई नहीं है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी वह इसी तरह सीटें जीत ले। वहीँ 2019 के लिए विपक्ष एकजुट होने की तैयारी कर रहा है।

जहाँ तक परफॉर्मेंस का सवाल है तो मोदी सरकार के पास ऐसा कोई करिश्माई रिजल्ट कार्ड नहीं है जिसे वह जनता को दिखाकर पर प्रभावित कर सके और वोट हासिल कर सके। सरकार के पास अब समय भी कम है। इसलिए अब कोई बड़ा करिश्मा होने की उम्मीद भी नहीं की जा सकती।

2019 के चुनावो में बीजेपी द्वारा 2014 के चुनावो में किये गए वादों का हिसाब ज़रूर माँगा जाएगा। काशी क्योटो कितना बन पाया ये पीएम मोदी से उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जनता अवश्य पूछेगी। स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन, प्रति वर्ष दो करोड़ रोज़गार, महंगाई पर लगाम, विदेशो से काला धन वापसी, पाकिस्तान के एक के बदले दस सिर आदि कई ऐसे सवाल हैं जिनके जबाव बीजेपी नेता आसानी से नहीं दे पाएंगे।

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