क्या झूठा था आधार के ज़रिये 80हज़ार फ़र्ज़ी शिक्षकों के पकडे जाने का मोदी सरकार का दावा

नई दिल्ली। जनवरी महीने में उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई) द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आधार के जरिए 80 हजार फर्जी शिक्षकों के पता चलने का दावा किया था।

पांच और छह जनवरी को देश के विभिन्न अखबारों में आधार के बूते 80 हजार फर्जी शिक्षकों के पकड़ में आने की यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुए थी। लेकिन अब सरकार के इस दावे की सच्चाई पर सवाल उठ रहे हैं।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (आरटीआई) के तहत मांगी गयी जानकारी में सरकार से जानकारी मांगी गयी तो आरटीआई के जवाब में उच्च शिक्षा विभाग ने माना कि उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के तहत शिक्षकों के आधार नंबर की जानकारी मांगी गई थी।

सरकार की तरफ से मिले जबाव के मुताबिक गुरुजन पोर्टल पर जुटाए गए इस डेटा के मुताबिक, 85708 आधार नंबर डुप्लिकेट अथवा अवैध पाए गए हैं लेकिन फर्जी शिक्षकों की राज्यवार संख्या, इन शिक्षकों के नाम और इनके कॉलेज/ यूनिवर्सिटी के नाम की जानकारी होने से विभाग ने इंकार किया है।

हैरानी की बात है कि देश में करीब 80 हजार फर्जी शिक्षकों का पता चलने के बावजूद इस मामले की न तो कोई जांच हुई और न ही अभी तक किसी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस बारे में आरटीआई के तहत पूछ जाने पर भी उच्च शिक्षा विभाग ने यही जवाब दिया कि उसके पास यह इसकी जानकारी नहीं है।

आरटीआई के जरिए आधार से जुड़े दावे पर सवाल उठाने वाली अंजली भारद्वाज का कहना है कि फर्जी शिक्षकों का पता लगाने के केंद्रीय मंत्री के दावे के समर्थन में मानव संसाधन विकास मंत्रालय कोई पुख्ता सबूत या जानकारी नहीं दे पाया। यहां तक कि मंत्रालय को इन शिक्षकों और उनके संस्थानों के नाम तक मालूम नहीं हैं। अगर देश में 80 हजार फर्जी शिक्षक हैं तो कौन इन्हें वेतन दे रहा है? इस फर्जीवाडे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मंत्रालय ने कोई जांच या कार्रवाई क्यों नहीं की है?

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