क्या चुनाव आयोग से लेकर ईवीएम तक सब पहले से सैट है ?

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। गुजरात चुनाव में सिर्फ मर्यादाओं की मय्यत ही नहीं उठी बल्कि चुनावी आचार संहिता को धता बताकर जो खेल खेले गए उसे पूरे देश ने देखा। इसके बावजूद चुनाव आयोग की आँखें बंद हैं, गुजरात में क्या हुआ चुनाव आयोग को कुछ दिखाई नहीं दिया।

स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब दूसरे चरण के चुनाव के लिए एक सभा को सम्बोधित कर रहे थे तो उन्होंने सभा में एक दिन बाद होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए भी बीजेपी के लिए वोट मांगे। प्रथम दृष्टि में यह चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला है। जब चुनाव प्रचार समाप्त हो जाता है तो आप उस चुनाव के लिए वोट नहीं मांग सकते।

दूसरे मामले में बीजेपी ने पहले चरण के मतदान से एक दिन पहले चुनावी घोषणा पत्र जारी किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित किया। जानकारों केअनुसार मतदान से 48 घंटे पहले किसी तरह की घोषणा नहीं की जा सकती लेकिन यहाँ तो बीजेपी ने पूरा घोषणा पत्र जारी किया इसके बावजूद चुनाव आयोग आँखे बंद करके बैठा रहा।

तीसरे मामले में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14दिसंबर को साबरमती में मतदान करने के बाद रोड शो की शक्ल में पूरे काफिले के साथ निकलते हैं। वे अपनी गाडी के गेट पर खड़े हो जाते हैं। पहले से एकत्रित किये गए लोगों की तरफ हाथ हिलाते हैं उनका अभिवादन करते हैं। इसके बावजूद चुनाव आयोग इसे न तो रोड शो मानने को तैयार है और न आचार संहिता का उल्लंघन।

वहीँ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सिर्फ टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हैं। चुनाव आयोग इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए उन्हें नोटिस जारी करता है और दो चैनलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश देता है।

स्वयं प्रधानमंत्री और बीजेपी नेता अपनी चुनावी सभाओं में पाकिस्तान का ज़िक्र करते हैं। दावा करते हैं कि गुजरात के चुनाव में बीजेपी को हराने के कांग्रेस पाकिस्तान का सहयोग ले रही है। इतना ही नहीं पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व सेनाध्यक्ष का नाम पाकिस्तान के साथ जोड़कर पेश किया जाता है। चुनाव जीतने के लिए झूठी कहानी बनाने के लिए मर्यादाओं का कत्ल कर दिया जाता है। इसके बावजूद चुनाव आयोग आँख और कान बंद करके बैठा रहता है।

गुजरात में जिस तरह से चुनाव में मर्यादाओं का कत्ल हुआ उस पर चुनाव आयोग की ख़ामोशी को देखकर लगता है कि पूरा मामला पहले से सैट है। चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी नेताओं और स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाओं में भीड़ नहीं जुटी इसके बावजूद एग्जिट पोल में बीजेपी जीत रही है।

गुजरात में दूसरे चरण के चुनाव के बाद आये एग्जिट पोल को लेकर उन लोगों में नाराज़गी है जो कहीं न कहीं बीजेपी की नीतियों से परे हैं। सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बड़ी चर्चा है कि क्या गुजरात में भी ईवीएम को लेकर कोई खेल हुआ है ?

सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि जिस तरह चुनाव आयोग बीजेपी का आँख बंद करके फेवर कर रहा है उसे देखकर कोई भी ये कहेगा कि ऊपर से नीचे तक सब कुछ पहले से सैट था।

सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि गुजरात में चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता नहीं साबित कर सका है। ऐसे में कहा जा सकता है कि ईवीएम से लेकर चुनाव आयोग तक सब कुछ पहले से ही सैट था। गुजरात चुनाव तो एक रस्म अदायगी थी।

वही जानकारों की माने तो कांग्रेस अब इस मुद्दे पर खामोश नहीं रहेगी। कांग्रेस ने गुजरात में पूरी ताकत से चुनाव लड़ा और उसे जनता से बड़ा सहयोग भी मिला था। कांग्रेस ने अपने दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मार्फत सुप्रीम कोर्ट में इस बात के लिए आवेदन किया था कि गुजरात चुनाव में वीवीपैट से निकली २५%पर्चियों का ईवीएम से मिलान किया जाए। लेकिन फिलहाल इसे सुप्रीमकोर्ट ने यह कहकर ख़ारिज कर दिया है कि वह इसमें दखल नहीं दे सकता।

कांग्रेस सूत्रों की माने तो इस मामले में पार्टी एक दो दिन में अलग से याचिका दाखिल करेगी। सूत्रों के अनुसार गुजरात में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा है इसलिए वह जीत की उम्मीद संजोये बैठी है लेकिन एग्जिट पोल जो बता रहे हैं वह इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि कहीं कुछ दाल में काला है। इसलिए पार्टी इस मामले को बड़े स्तर पर उठाने का मन बना चुकी है।

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें