क्या कर्नाटक में बेअसर साबित हो रहे है हिंदुत्व और येदुरप्पा ?

नई दिल्ली। कर्नाटक में अगले दो महीनो के अंदर विधानसभा चुनाव होने की पूर्ण सम्भावना है। बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के बाद अब कांग्रेस ने कर्नाटक में जन आशीर्वाद यात्रा शुरू की है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शनिवार को चार दिनों के दौरे पर कर्नाटक पहुंचे हैं। उन्होंने बेल्लारी से कर्नाटक में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की है। बेल्लारी कांग्रेस के लिए इसलिए भी खास हैं क्यों कि पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यहाँ से लोकसभा चुनाव लड़ा था और बीजेपी की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज को पराजित किया था।

जहाँ तक रणनीति का प्रश्न है तो कांग्रेस और बीजेपी की रणनीति कर्नाटक चुनाव के लिए भी वही है जो हाल ही में गुजरात में इस्तेमाल की गयी थी। बीजेपी जहाँ विकास और हिंदुत्व की बात कर रही है वहीँ कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व और केंद्र सरकार की नाकामियों के अलावा राज्य सरकार की उपलब्धियां गिना रही है।

बीजेपी और कांग्रेस के लिए गुजरात और कर्नाटक में सिर्फ इतना ही फर्क है कि गुजरात विधानसभा के चुनाव के समय वहां बीजेपी सत्ता में थी जबकि कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में है।

बीजेपी ने कर्नाटक में हिंदुत्व को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी फील्ड बनाने के लिए भेजा था। वहीँ राज्य में आरएसएस के कुछ नेता भी पूरी शिदद्त के साथ बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे को धार देने में जुटे है।

दूसरी तरफ कांग्रेस कर्नाटक में भी गुजरात की तर्ज पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है। वह बीजेपी के हार्डकोर हिंदुत्व का जबाव सॉफ्टकोर हिंदुत्व से देना चाहती है। यही कारण है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात की तर्ज पर कर्नाटक में भी अपना मंदिर भ्रमण जारी रखा है।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य के पार्टी नेताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पीएम मोदी और बीजेपी नेताओं पर व्यक्तिगत हमले करने से बचें। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि राज्य सरकार की एक एक उपलब्धि को जनता तक पहुंचाने के लिए प्रमाणित आंकड़े पेश करें।

दूसरी तरफ यह खबर भी आ रही है कि बीजेपी की रीढ़ कहे जाने वाले आरएसएस नेताओं को बीजेपी से कुछ शिकायतें हैं। सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक की आरएसएस इकाई के कुछ नेता येदुरप्पा को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करने के खिलाफ हैं और वे चुनाव में काम नहीं करने के इरादे जता चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिख कर येदुरप्पा की जगह किसी अन्य बीजेपी नेता को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करने की सिफारिश की है। सूत्रों के मुताबिक संघ नेता ने पार्टी नेताओं को आगाह किया है कि राज्य में संघ से बहुत अधिक अपेक्षा न रखें।

सूत्रों ने कहा कि 4 फरवरी को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि राज्य में पढ़े लिखे लोगों बीजेपी से मोह भंग हो चुका है। पत्र में इसकी वजह बताते हुए लिखा है कि केंद्र में बीजेपी की सरकार को अब पर्याप्त समय हो चुका है। ऐसे में केंद्र की योजनाओं और कार्यक्रमों के परिणामो का ज़मीन पर न दिखना पार्टी के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकता है।

सूत्रों ने कहा कि आम बजट आने के तुरंत बाद लिखे गए इस पत्र में बजट को चुनावी दृष्टि अयोग्य करार दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि कर्नाटक एक ऐसा राज्य है जहाँ लोगों को सिर्फ भाषणों से भ्रमित नहीं किया जा सकता, जो हम दावे कर रहे हैं वह दिखना भी चाहिए।

वहीँ जानकारों की माने तो बीजेपी कर्नाटक में जिस हिंदुत्व के एजेंडे को अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की थी वह मौथरा साबित हो रहा है। यही कारण है कि बीजेपी को मजबूरन इसे साइड रख कर राज्य सरकार के कामकाज को अपने एजेंडे में प्राथमिकता पर रखना पड़ा है।

गौरतलब है कि हाल ही में कर्नाटक में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्लॉटर हॉउस और बीफ का मुद्दा उठाया था लेकिन यह मुद्दा आगे नहीं बढ़ाया जा सका। बल्कि स्थानीय मीडिया ने गोवा द्वारा कर्नाटक से बीफ ख़रीदे जाने का मुद्दा प्रकाशित कर योगी आदित्यनाथ के दावों की हवा निकाल दी थी।

इतना ही नहीं बीजेपी के लिए दूसरी दुविधा येदुरप्पा को लेकर है। इस बार जनता उन्हें हाथो हाथ नहीं ले रही। बता दें कि बीएस येदुरप्पा के कर्नाटक का मुख्यमंत्री रहते हुए उन पर घोटाले का आरोप लगा था और भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर पद से बर्खास्त किया गया तथा जेल जाना पड़ा था।

फिलहाल कर्नाटक विधानसभा चुनावो को लेकर कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। लेकिन जैसे जैसे चुनाव नजदीक आएगा नए नए मुद्दे भी जन्म लेंगे। अभी चुनाव आयोग ने कर्नाटक विधानसभा चुनावो का कार्यक्रम भी घोषित नहीं किया है।

(राजा ज़ैद)

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