क्या इसलिए अहमद पटेल ने मांगी सोनिया गांधी से माफ़ी ?

नई दिल्ली। शुक्रवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में सोनिया गांधी के 19 सालों के कार्यकाल के प्रस्ताव पर बोलते हुए उनके राजनीतिक सलाहकार सांसद अहमद पटेलने रुंधे गले से कहा मैडम इतने सालों में कोई गलती हुई हो तो माफ कर दीजिएगा।

मीडिया में अहमद पटेल की माफ़ी को लेकर दो मतलब निकाले जा रहे हैं। पहला यह कि अहमद पटेल कई वर्षो तक सोनिया गांधी के राजनैतिक सलाहकार रहे इसलिए उन्होंने भावुकता वश माफ़ी तलब की। दूसरे मामले में इसे गुजरात चुनाव में कांग्रेस की पराजय से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों की माने गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद अब कांग्रेस के अंदर इस बार को लेकर बहस छिड़ी है कि चुनाव के दौरान दौरान भारतीय जनता पार्टी के लिए मुद्दे कौन तैयार कर रहा था ? सूत्रों के मुताबिक अब इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है।

चुनाव का एलान होने के बाद शुरुआत में गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के पास कांग्रेस के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा नहीं था लेकिन जैसे जैसे प्रचार आगे बढ़ा भारतीय जनता पार्टी को मुद्दे मिलते गए और ये मुद्दे खुद कांग्रेस नेताओं की कमियों से उभर कर सामने आये थे। जिसका बीजेपी ने फायदा उठाया था।

पहला मुद्दा जो बीजेपी को तब मिला जब गुजरात द्वारा कांग्रेस नेता अहमद पटेल से जुड़े एक अस्पताल के कर्मचारी को आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने की आशंका पर गिरफ्तार किया गया। इस मामले में बीजेपी ने कांग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम लेकर कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला था। इतना ही नहीं गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने तो अहमद पटेल से राज्य सभा इस्तीफा देने तक की मांग कर डाली।

बात यहीं खत्म नहीं हुई। इस मुद्दे पर नुकसान की भरपाई कर उभरी कांग्रेस ने दूसरा मुद्दा बीजेपी को उस वक़्त थमा दिया जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम सोमनाथ मंदिर के दर्शनार्थियों के हिन्दू रजिस्टर में लिखा गया। इस रजिस्टर में कांग्रेस अध्यक्ष के नाम के साथ कांग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम भी था।

यह गलती जानबूझकर हुई या अनजाने में लेकिन बीजेपी को एक बड़ा मुद्दा मिल गया। बीजेपी ने इस मुद्दे को उछालकर कांग्रेस और राहुल गांधी को हिन्दू विरोधी साबित करने की कोशिश। इस मुद्दे से हुए नुकसान की भरपाई के लिए आनन फानन में कई कांग्रेस नेताओं को बचाव में आना पड़ा था।

इस मुद्दे को लेकर शक की सुई एक बड़े षड्यंत्र की तरफ घूमती दिखी। कांग्रेस के अंदर इस बात को लेकर कयास लगाए जाने लगे कि आखिर राहुल गांधी का नाम हिन्दू रजिस्टर में अहमद पटेल के साथ किसने लिखा। इस पर जानकारी हुई कि मीडिया कोर्डिनेटर ने राहुल गांधी का नाम हिन्दू रजिस्टर में इसलिए लिखा क्यों कि उसे ऐसा करने को कहा गया था।

सूत्रों की माने तो कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने मीडिया कोर्डिनेटर को तलब कर पूरी जानकारी मांगी तथा कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत को सच्चाई से अवगत कराया। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत ने पूरा मामला तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताया था।

सूत्रों की माने तो गुजरात एटीएस द्वारा भरुच के अस्पताल से जुड़े एक व्यक्ति की संदिग्ध गतिविधियों के मद्देनज़र हुई गिफ्तारी के बाद कांग्रेस आलाकमान द्वारा अहमद पटेल को प्रचार से अलग रखने के लिए कहा गया था।

गौरतलब है कि वर्ष 2012 के चुनाव में बीजेपी द्वारा अहमद पटेल का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर उछालकर हिन्दू मुस्लिम मुद्दा गरमाने की कोशिश की गयी थी। इस खतरे को भांपते हुए कांग्रेस के रणनीतिकार फूँक फूँक कर कदम रख रहे थे। इसके बावजूद पूरे चुनाव प्रचार के दौरान तीन बड़े मुद्दों में बीजेपी ने कांग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम उछालकर चुनाव में एक धर्म विशेष के मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की।

बीजेपी ने कब कब लिया अहमद पटेल का नाम :

अहमद पटेल से जुड़े अस्पताल में काम करने वाले एक मुस्लिम कर्मचारी की गुजरात एटीएस द्वारा गिरफ़्तारी के बाद बीजेपी नेताओं ने अहमद पटेल का नाम लेकर कांग्रेस पर कीचड़ उछाली। बीजेपी नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने यहाँ तक कह दिया कि “कांग्रेस का हाथ आतंकियों के साथ।” इतना ही नहीं विजय रूपाणी ने अहमद पटेल से राज्य सभा की सदस्य्ता से इस्तीफा देने की मांग भी की।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर जाने के दौरान हिन्दू दर्शनार्थियों के रजिस्टर में राहुल गांधी और अहमद पटेल के नाम लिखने का मामला बीजेपी ने उछाला गया। हिन्दू रजिस्टर में राहुल गांधी और अहमद पटेल के नाम को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के धर्म को लेकर ढिंढोरा पीटा।

कांग्रेस से निलंबित नेता मणिशंकर अय्यर के निवास पर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री की एक बैठक में मोजुदगी की खबर को भी बीजेपी ने कांग्रेस नेता अहमद पटेल के साथ जोड़ दिया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में कहा कि “पाकिस्तान गुजरात के चुनाव में दखल दे रहा है। अहमद भाई को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने बैठक की है।”

अब चूँकि गुजरात चुनाव सम्पन्न हो गए हैं और कांग्रेस के हाथ में आयी हुई बाजी उसके हाथ से निकल चुकी है और बीजेपी एक बार फिर सरकार बनाने में सफल हो गयी है। चुनावो में पार्टी की पराजय क्यों हुई? इस पर मंथन करने के लिए स्वयं कांग्रेस उपाध्यक्ष गुजरात के दौरे पर हैं और वे गुजरात के नेताओं से इस मामले में विचार विमर्श कर रहे हैं लेकिन गुजरात चुनाव सम्पन्न होने के बाद भी कई सवाल ऐसे हैं जिनका जबाव अभी मिलना बाकी है।

सबसे अहम सवाल यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, गुजरात के प्रभारी अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी, कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल, अर्जुन मोढवाडिया, सिद्धार्थ पटेल तथा कांग्रेस के अन्य नेताओं ने दिन रात पसीना बहाकर पार्टी को जीत की दहलीज तक लाकर खड़ा तो कर दिया था लेकिन आखिर क्या हुआ जो एक के बाद एक नए मुद्दे कांग्रेस की तरफ से बीजेपी को मिलते रहे और उसने मौके का पूरा फायदा उठाकर कांग्रेस के हाथ से जीत छीन ली।

(राजा ज़ैद)

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें