कैराना में हार की ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नहीं कोई, क्या बदले जाएंगे सीएम योगी ?

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जिस बहुमत के साथ सरकार बनी थी उसका असर बहुत दिनों तक नहीं रहा है। फूलपुर और गोरखपुर में हार के बाद कैराना और नूरपुर में हुई पराजय से जहाँ पार्टी की किरकिरी हुई है वहीँ सीएम योगी आदित्यनाथ के कामकाज के तरीके पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।

सूत्रों की माने तो फिलहाल भारतीय जनता पार्टी कैराना और नूरपुर में हुई हार को लेकर मंथन में लगी है। सूत्रों की माने तो कैराना और नूरपुर की हार की समीक्षा के लिए जल्द ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह यूपी बीजेपी अध्यक्ष और सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ एक बैठक तलब कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी खेमो में बंटी हुई है। एक खेमा सीएम योगी आदित्यनाथ का है तो दूसरा खेमा उप मुख्यमंत्री केशव सिंह मौर्य का है जबकि तीसरा खेमा स्वयं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे का है।

सूत्रों के मुताबिक अधिकतर बीजेपी नेता कैराना और नूरपुर में हार के लिए सीएम योगी की गलत बयानबाज़ियों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि अधिकतर नेताओं का कहना है कि सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा कैराना में जिन्ना और गन्ना का मुद्दा उठाना बीजेपी को भारी पड़ा है।

सूत्रों की माने तो 2019 के आम चुनावो से पूर्व उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं बन रही हैं। सूत्रों की माने तो प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडे की जगह किसी पिछड़ा वर्ग के नेता को प्रदेश बीजेपी की कमान मिलना तय है। वहीँ सीएम योगी आदित्यनाथ भी नप सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की कट्टर छवि के चलते पढ़ा लिखा तबका बीजेपी से दूर हो रहा है। अनावश्यक बयानों और अमर्यादित बयानों के चलते कभी बीजेपी का परम्परागत वोट रहे कारोबारी वर्ग में बीजेपी के प्रति उदासीनता बढ़ी है।

सूत्रों ने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि पेट्रोल डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के चलते बीजेपी के दावे झूठे साबित हुए हैं। 2014 में महंगाई कम करने के वादे पर केंद्र की सत्ता में पहुंची बीजेपी के नेता फ़िलहाल महंगाई पर जनता को जबाव नहीं दे पा रहे।

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