कासगंज में प्रशासन की सख्ती के आगे हिन्दू संगठनों को टेकने पड़े घुटने

पo उत्तर प्रदेश ब्यूरो। पंद्रह अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कासगंज में सुरक्षा के खासे इंतजाम किये गए थे। हिन्दू संगठन गणतंत्र दिवस की तर्ज पर स्वतंत्रता दिवस के दिन भी तिरंगा यात्रा निकालने पर अड़े थे लेकिन प्रशासन की सख्ती के आगे उन्हें घुटने टेकने पड़े।

प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए तिरंगा यात्रा की अनुमति नहीं दी। हालाँकि स्थानीय बीजेपी नेताओं ने भी हिन्दू संगठनों के सुर में सुर मिलाते हुए तिरंगा यात्रा निकालने की अनुमति देने का दबाव बनाया।

इसके बावजूद प्रशासन ने अपना सख्त रवैया कायम रखा और अंततः हिन्दू संगठनों को अपनी तिरंगा यात्रा को रद्द करना पड़ा। प्रशासन द्वारा तिरंगा यात्रा की अनुमति न दिए जाने के पीछे 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा के नाम पर हुए सांप्रदायिक बवाल को बताया जा रहा है।

पिछले वर्ष हिन्दू संगठनों ने जबरन तिरंगा यात्रा को अल्पसंख्यको के इलाके में होकर निकालने की कोशिश की थी। इसके बाद बढे विवाद में अभिषेक गुप्ता उर्फ़ चंदन नामक युवक की मौत हो गयी थी। इस बार प्रशासन ने शरारती तत्वों के मंसूबो पर पानी फेर दिया।

कासगंज के जिलाधिकारी आर. पी. सिंह ने मीडिया को बताया कि ‘‘तिरंगा यात्रा का कोई मतलब नहीं था। प्रशासन ने पिछली 26 जनवरी की घटना के मद्देनजर व्यापक प्रबंध किये थे। पूरे जिले में स्थानीय पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स और पीएसी बल के जवान तैनात थे।’’

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन और बकरीद के अवसर पर भी पूरे जिले में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की जाएगी। माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले से सख्ती से निपटा जाएगा।

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