उपचुनाव में दोनो लोकसभा सीटें जीतने के लिए कांग्रेस ने शुरू की बीजेपी की घेराबंदी

नई दिल्ली। राजस्थान में 29 जनवरी को होने जा रहे दो लोकसभा सीटों के उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने बीजेपी की घेराबंदी कर ली है। कांग्रेस की घेराबंदी का दबाव बीजेपी पर दिखाई देने लगा है। चुनाव में सिर्फ 25 दिनों का समय बाकी है और अभी तक बीजेपी अपने उम्मीदवारों के नाम तय नहीं कर पाई है।

वहीँ कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नाम के चयन में इस बार बीजेपी से बाजी मार ली है और अजमेर सीट पर अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। अजमेर और अलवर संसदीय सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इन उपचुनावों को विधानसभा चुनावो का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इसलिए दोनो सीटों और बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर होना तय है।

जिन दो सीटों पर लोकसभा का उपचुनाव होना है उन पर 2014 में बीजेपी उम्मीदवार विजयी हुए थे। अजमेर सीट पर बीजेपी के सांवर लाल जाट तथा अलवर सीट पर महंत चांद नाथ विजयी हुए थे। वहीँ इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में दोनो सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव जीते थे।

दोनो लोकसभा सीटों पर जातिगत आंकड़े चुनाव को प्रभावित करने की हैसियत रखते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने जातीय समीरकरण को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है। पार्टी ने अलवर सीट पर यादव बाहुल्य मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए पूर्व सांसद डॉ. करण सिंह यादव को टिकट दिया है। वहीँ अलवर से जाट समुदाय का प्रत्याशी उतारा जाना तय माना जा रहा है।

कांग्रेस सूत्रों की माने तो पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने निजी तौर पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट से अलग अलग बात कर दोनो सीटें जीतने के लिए हर सम्भव प्रयास करने को कहा है। वहीँ राज्य में गुटबंदी को भांपते हुए पार्टी को एकजुट होकर चलाने के निर्देश दिए हैं।

पार्टी सूत्रों की माने तो अजमेर सीट पर पूरी ज़िम्मेदारी सचिन पायलट और सीपी जोशी काम देखेंगे वहीँ अलवर सीट पर पूर्व सीएम अशोक गेहलोत और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र भंवर सिंह चुनाव के कामकाज की ज़िम्मेदारी संभालेंगे।

गौरतलब है कि इस वर्ष नवंबर तक राजस्थान में विधानसभा चुनाव भी होने हैं ऐसे में यदि कांग्रेस दोनों सीटों पर विजय हासिल करती है तो वह बीजेपी पर विधानसभा चुनावो से पहले बड़ा मानसिक दबाव बनाने में सफल हो सकती है।

हालाँकि राज्य में अभी से सत्ता विरोधी हवा को महसूस किया जा रहा है। बेरोज़गारी के मुद्दे पर घिरी वसुंधरा सरकार से युवा खिलाफ हैं। जिसका बड़ा फायदा कांग्रेस को लोकसभा उप चुनाव में मिल सकता है।

फिलहाल सभी की नज़रें बीजेपी पर लगी हैं। जिसने अभी तक दोनों सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा नहीं की है। बीजेपी द्वारा उम्मीदवारों के नाम की घोषणा के बाद उपचुनावो की तस्वीर और साफ़ होने की सम्भावना है।

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