कांग्रेस नेताओं के गले नहीं उतर रहे चुनाव परिणाम, पार्टी के हाथ से फिसला नेता विपक्ष का पद

नई दिल्ली। इस बार भी लोकसभा में कांग्रेस को नेता विपक्ष का पद नहीं मिल सकेगा। अहम कारण है कि 543 सदस्यों वाली लोकसभा में कांग्रेस को सिर्फ 52 सीटें मिली हैं जबकि विपक्ष का दर्जा प्राप्त करने के लिए कम से कम दो से तीन और सीटों की जरूरत थी।

वहीँ अब माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में करारी पराजय के बाद पराजय के कारणों पर मंथन करने के लिए जल्द ही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई जा सकती है। पार्टी सूत्रों की माने तो चुनावी नतीजे पार्टी के लिए अप्रत्याशित हैं।

सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने प्रदेशो से प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र के पूरे आंकड़े तलब किये हैं। जिस पर पार्टी की होने वाली बैठक में मंथन हो सकता है। सूत्रों ने कहा कि पार्टी नेताओं का मनाना है कि अमेठी में राहुल गांधी की पराजय अप्रत्याशित हैं, साथ ही कर्णाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र में जो नतीजे आये हैं वे उम्मीद से बहुत दूर हैं।

सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में दीर्घकालिक रणनीति पर विचार के अलावा पार्टी में नए चेहरों को तरजीह देने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। सूत्रों की माने तो चुनाव परिणाम पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों के गले नहीं उतर रहे और वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश को छोड़ भी दिया जाए तो अन्य राज्यों जहाँ कांग्रेस की सरकारें अभी हाल ही में बनी हैं, उनमे पंजाब को छोड़कर सभी जगह पार्टी का सूपड़ा साफ़ होना किसी षड्यंत्र से कम नहीं लगता।

सूत्रों की माने तो आंध्र प्रदेश में कांग्रेस जेडीएस गठबंधन के बावजूद पार्टी का निराशाजनक प्रदर्शन पार्टी को झकझोर देने वाला है। ऐसे में पार्टी को निचले स्तर से पूरी फीडबैक लेकर पराजय का आंकलन करना होगा।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पार्टी का एक सीट भी न हीट पाना खासकर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान जैसे वे राज्य जहां कांग्रेस का भाजपा से सीधा मुकाबला था किसी बड़े षड्यंत्र की तरफ इशारा करता है।

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