कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए पुराना फॉर्मूला इस्तेमाल करेंगी सोनिया

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेल चुकी कांग्रेस को फिर से संजीवनी देने की कोशिश कर रहीं पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने पुराने फॉर्मूले को लागू करेंगी। इसी फॉर्मूले से 2005 में उन्होंने कांग्रेस को सत्ता के शिखर तक पहुँचाया था।

सोनिया के इस पुराने फॉर्मूले में पार्टी के अंदर चल रही गुटबंदी पर नकेल कसने के साथ साथ गुटबंदी करने वाले नेताओं को ज़िम्मेदारी का अहसास कराना शामिल है। 2005 में सोनिया गांधी का युवा और अनुभव का फॉर्मूला हिट रहा था। इसलिए पार्टी को मजबूत करने के लिए राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन, फ्रंटलो को एक्टिव करने और पार्टी के अंदर गुटबंदी को समाप्त करने के लिए काम शुरू हो गया है।

सोनिया गांधी ने पार्टी की बागडोर सँभालने के बाद सबसे पहले हरियाणा में चल रही गुटबंदी पर शिकंजा कसा। उन्होंने हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर के बीच चल रही रस्साकशी पर ब्रेक लगाते हुए राज्य की कमान कुमार शैलजा को सौंप दी। इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमन्त्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधानसभा चुनाव में बड़ी ज़िम्मेदारी देकर उन्हें भी शांत कर दिया।

अब सोनिया गांधी मध्य प्रदेश में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच चल रही उठापटक पर फैसला लेने जा रही हैं। पार्टी सूत्रों की माने मंगलवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिल्ली तलब किया गया है। वे कल सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे।

सूत्रों ने कहा कि जल्द ही दिग्विजय सिंह को भी दिल्ली बुलाया जाएगा और आवश्यकता पड़ी तो सिंधिया और दिग्विजय को आमने सामने बैठाकर बातचीत की जायेगी।

सूत्रों ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर न्युक्ति जल्द की जाएगी लेकिन सोनिया चाहती हैं कि नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय होने से पहले वहां गुटबंदी और बेवजह की बयानबाज़ी बंद होनी चाहिए।

सूत्रों ने कहा कि अभी हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में सोनिया गांधी ने राज्य कांग्रेस की स्थति पर कमलनाथ से पूरी जानकारी ली है।

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