कांग्रेस के इस कार्ड से खतरे में हैं शिवराज की सीट

भोपाल ब्यूरो। मध्य प्रदेश में आखिरी लिस्ट में कांग्रेस ने राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मज़बूत उम्मीदवार का एलान कर उनके लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है।

कांग्रेस ने बुधनी विधानसभा सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट से राज्य के सीएम शिवराज सिंह चौहान भी चुनाव मैदान में हैं।

याद दिला दें कि 2003 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ राघोगढ़ से शिवराज सिंह चौहान को मैदान में उतारा था। बीजेपी को इस चुनाव में भारी बहुमत मिला था, लेकिन शिवराज चुनाव हार गए थे।

इस फॉर्मूले को कांग्रेस ने एक बार फिर से दोहराया है। अरुण यादव को शिवराज सिंह के खिलाफ मैदान में उतारकर कांग्रेस ने उन्हें घर में ही घेरने की रणनीति बनायीं है। जिसका असर भी दिख रहा है।

अरुण यादव कांग्रेस के उन बड़े ओबीसी नेताओं में से एक हैं जिनका व्यापक जनाधार है। ऐसे में ओबीसी मतों का विभाजन तय है जो शिवराज सिंह के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश में बीजेपी पहले से ही सरकार विरोधी लहर का सामना कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूरे प्रदेश की कमान संभाल रहे हैं लेकिन अब कांग्रेस ने शिवराज सिंह के सामने मजबूत उम्मीदवार देकर उन्हें अपनी सीट पर अधिक ध्यान केंद्रित करने को विवश कर दिया है।

अरुण यादव ज़मीन से जुड़े नेता हैं। वे 14वीं और 15वीं लोकसभा लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे हैं। उनकी कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद अरुण यादव अपनी सीट जीतने में कामयाब रहे थे।

अरुण यादव को उम्मीदवार बनाये जाने से सीएम शिवराज सिंह के लिए अब बुधनी विधानसभा सीट पर एकतरफा जीत दर्ज करना मुश्किल हो जायेगा। कांग्रेस द्वारा अरुण यादव को उम्मीदवार बनाये जाने से बुधनी विधानसभा सीट के जातीय समीकरण गड़बड़ा गए हैं। फिलहाल देखना है कि अरुण यादव शिवराज सिंह के वोट बैंक में कितनी बड़ी सेंधमारी कर पाते हैं।

मध्य प्रदेश में आज नामांकन का अंतिम दिन है। राज्य में 28 नवंबर को 230 विधानसभा क्षेत्रो के लिए चुनाव होगा। चुनाव आयोग सभी सीटों पर वीवीपैट मशीनों के इस्तेमाल की घोषणा कर चूका है।

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