कांग्रेस की मांग “ईवीएम पर हो जनमत संग्रह, मतपत्रों से कराये जाएं चुनाव “

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर ईवीएम को लेकर सवाल उठाते हुए पुरानी बैलेट पेपर पद्धति से चुनाव कराये जाने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव ईवीएम से कराये जाएँ या बैलेट पेपर से इस पर जनता की राय जानने के लिए जनमत संग्रह कराया जाए।

एक इंटरव्यू में सोमवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने ईवीएम के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए कहा कि ईवीएम को लेकर पैदा हुई शंका दूर होनी चाहिए। उन्होंने दुनिया के कई देशो के उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि अमेरिका और जापान जैसे देशो ने ईवीएम से चुनाव कराना बंद कर दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि देश को एक बार फिर चुनाव की पुरानी पद्धति पर लौटना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अब ईवीएम की जगह मतपत्रों से चुनाव कराये जाने की आवश्यकता है।

वीरप्पा मोइली ने कहा कि देश की जनता को तय करना है कि वह ईवीएम से चुनाव चाहती है या मतपत्रों से। मोइली ने जनता की राय जानने के लिए जनमत कराये जाने कोई आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि ईवीएम को लेकर पैदा हुई शंकाएं दूर होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि भले ही जनमत में मिली राय एनडीए के पक्ष में ही क्यों न जाए फिर भी कम से कम इस मुद्दे पर शंका का समाधान तो होगा कि जनता क्या चाहती है। वीरप्पा मोइली ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान ईवीएम को लेकर कई बार सवाल उठे लेकिन चुनाव आयोग ने इस पर कुछ नहीं किया।

गौरतलब है कि अभी हाल ही में रायबरेली में अपने संबोधन में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने भी ईवीएम को लेकर सवाल उठाये थे। सोनिया गांधी के बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली द्वारा ईवीएम को लेकर सवाल उठाये जाने से साफ़ है कि कांग्रेस जल्द ही ईवीएम को लेकर आरपार की लड़ाई शुरू कर सकती है।

बता दें कि ईवीएम को लेकर सबसे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सवाल उठाये थे। मायावती द्वारा उठाये गए सवालो का समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष के कई दलों ने समर्थन किया था।

इसके बाद उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावो के बाद विपक्ष द्वारा ईवीएम को लेकर फिर से सवाल उठाये गए। इसके बाद से विपक्ष लगातार ईवीएम की जगह मतपत्रों से चुनाव कराये जाने की मांग करता रहा है।

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