कर्नाटक: रैलियों से नहीं बन रही बीजेपी की बात तो देवगौड़ा आये याद

नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी सारे एक्सपेरिमेंट करने के बाद भी खुद में आत्मविश्वास पैदा नहीं कर पा रही है। कर्नाटक का रण जीतने का दावा करने वाली बीजेपी में शुरू में ही आत्मविश्वास की कमी साफ़ दिखाई दे रही है और बचा कुचा आत्मविश्वास पार्टी के इंटर्नल सर्वे ने धो डाला है।

बीजेपी सूत्रों की माने तो पार्टी के आंतरिक सर्वे में कहा गया है कि कर्नाटक में किसी भी हाल में पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हो रहा। सूत्रों ने कहा कि कर्नाटक में बीजेपी के हिंदुत्व से लेकर विकास के वादों के एजेंडे मौथरे साबित हुए हैं।

जानकारों के अनुसार कर्नाटक में कांग्रेस से पिछड़ रही बीजेपी अभी तक यह तय नहीं कर पायी है कि उसके अहम मुद्दे कौन से हैं। पार्टी एक तरफ कहती है कि रेप पर राजनीति नहीं होनी चाहिए वहीँ दूसरी तरफ वह कर्नाटक में रेप की घटनाओं को राज्य सरकार की कमी बताकर विज्ञापन जारी कर रही है।

इतना ही नहीं पार्टी भ्रष्टाचार से लड़ने और ईमानदार सरकार देने की बात करती है लेकिन उसके मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर येदुरप्पा हैं जो स्वयं भ्रष्टाचार के दाग से रंगे हैं।

बीजेपी स्वयं को धर्म आधारित राजनीति के खिलाफ बताती है और कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार के लिंगायत समुदाय को अलग धर्म की मान्यता देने के निर्णय को हिंदू समुदाय के विभाजन का आरोप लगा रही है। इतना ही नहीं कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को प्रचार के लिए भेजकर अपने कहे हुए को ही नकार दिया है।

बीजेपी सूत्रों की माने तो पार्टी का आंतरिक सर्वे और चुनाव पूर्व आये सर्वेक्षणों से बीजेपी को बड़ा धक्का अवश्य लगा है। फ़िलहाल बीजेपी अपनी बदली हुई रणनीति को लेकर आगे बढ़ रही है।

सूत्रों के मुताबिक बदली हुई रणनीति के तहत अब बीजेपी सेकुलर जनता दल से नजदीकियां बढ़ाएगी। बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि पार्टी किसी तरह 70 सीटों का आंकड़ा छूने में कामयाब रहती है तो वह देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेकुलर से मिलकर सत्ता बनाने के लक्ष्य के आसपास पहुँच सकती है।

सूत्रों ने कहा कि हालाँकि अभी तक यह तय नहीं है कि कर्नाटक में यदि त्रिशंकु विधानसभा के आसार बनते हैं तो ऐसी स्थति में जनता दल सेकुलर बीजेपी के साथ जाएगी अथवा अपने सेकुलर स्वरुप को बरकरार रखते हुए सरकार बनाने के लिए कांग्रेस का समर्थन करेगी।

सूत्रों के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी तथा अन्य बीजेपी नेताओं द्वारा चुनावी रैलियों में कांग्रेस पर हमले किये जा रहे हैं लेकिन जनता दल सेकुलर को पूरा सम्मान बख्श रहे हैं। जो इस बात के संकेत हैं कि कर्नाटक में बीजेपी जनता दल सेकुलर में अपनी संभावनाएं टटोलने में लग गयी है।

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