कर्नाटक में सस्पेंस बरकरार लेकिन राज्य सरकार से खतरा टलने के आसार

बेंगलुरु। कर्नाटक में इस्तीफा देने वाले कांग्रेस जेडीएस के सभी 13 विधायकों के इस्तीफो को विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार द्वारा स्वीकार करने से इंकार किये जाने के बाद अब सस्पेंस और गहरा गया है लेकिन जानकारों की माने तो राज्य की कुमार स्वामी सरकार से फ़िलहाल खतरा टलता दिख रहा है।

विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कहा कि 13 में से 8 विधायकों के इस्तीफे कानूनन तौर पर सही नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस बारे में राज्यपाल वजुभाई पटेल को भी जानकारी दे दी है।

उन्होंने कहा, ”किसी भी बागी विधायक ने मुझसे मुलाकात नहीं की। मैंने राज्यपाल को भरोसा दिलाया है कि मैं संविधान के तहत काम करूंगा। मैंने विधायकों को मिलने का वक्त दे दिया है।’

विधानसभा स्पीकर ने कहा कि “दोनों दलों के विधायकों के बाकी आठ इस्तीफे सही प्रारूप में नहीं हैं। मैंने उन्हें 21 जुलाई तक का समय दिया है कि वे उन्हें फिर से जमा करें और अपने संबंधित विधानसभा क्षेत्रों से छोड़ने के कारण बताएं।”

उन्होंने कहा कि पांच विधायकों के इस्तीफे सही है जबकि आठ विधायकों के इस्तीफे सही नहीं हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह नियमावली पुस्तिका का पालन करेंगे और इन गतिविधियों के बारे में वरिष्ठों से परामर्श करेंगे कि इन इस्तीफों को स्वीकार करना चाहिए या अन्य तरह की कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बहुत सावधानी से निर्णय करना होगा। मेरा हर कदम इतिहास बनेगा। इसलिए मैं कोई गलती नहीं कर सकता हूं ताकि भविष्य की पीढ़ी मुझे आरोपी के तौर पर नहीं देखे।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ से उन्हें इस्तीफा अस्वीकार करने के संबंध में कोई पत्र मिला है, इस पर उन्होंने कहा कि अब तक उन्होंने कोई पत्र नहीं देखा है।

वहीँ दूसरी तरफ दिल्ली में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कर्नाटक हो रही उठापटक को देखते हुए कांग्रेस नेता गुलामनबी आज़ाद और बी. के. हरिप्रसाद को आनन-फानन में बेंगलुरु रवाना किया गया।

जिन आठ विधायकों के इस्तीफे गलत हैं और उन्हें सही प्रारूप में फिर से देने के लिए कहा गया है। इसमें बी.सी. पाटिल, एस.टी. सोमशेखर, बृती बसवराज, रमेश जारखोली, महेश कुमथल्ली, शिवराम हेब्बर, मुनिरत्ना (सभी कांग्रेस) और जेडी-एस के ए.एच. विश्वनाथ के नाम शामिल हैं।

क्या है विधानसभा की स्थति:

224 सदस्यीय विधानसभा में दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ भाजपा के पास 107 विधायक हैं जबकि बहुमत का आंकड़ा 113 है। अगर इन 13 विधायकों का इस्तीफे स्वीकार कर लिया जाता है तो गठबंधन का आंकड़ा घटकर 103 हो जायेगा। इसमें विधानसभा अध्यक्ष का भी एक वोट शामिल है।

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