कर्नाटक में ओवैसी से नजदीकियां बढ़ा रही कांग्रेस, हो सकते हैं गठबंधन का हिस्सा!

नई दिल्ली। कर्नाटक में इस वर्ष होने जा रहे विधानसभा चुनावो में बीजेपी को सत्ता की दौड़ से बाहर रखने के लिए राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस की आल इंडिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन से नजदीकियां बढ़ रही हैं।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले में एआईएमआईएम सुप्रीमो असद्दुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस की नजदीकियां बढ़ने के पीछे अहम कारण वे 60 विधानसभा सीटें हैं जहाँ ओवैसी अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं।

सूत्रों की माने तो दोनो ही पार्टियां इस बात को लेकर सहमत हैं कि यदि राज्य में मुसलमानो का वोट बंटा तो इसका पूरा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। ऐसे में कांग्रेस चाहती है कि कर्नाटक चुनाव में ओवैसी की पार्टी के साथ एक ऐसी सहमति तैयार हो जिससे मुस्लिम वोटों का बंटवारा रोका जा सके।

सूत्रों की माने तो अब एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी अब यह मानने लगे हैं कि बीजेपी को खदेड़ने के लिए कांग्रेस के साथ खड़े होने में कोई बुराई नहीं है।

वहीँ जानकारों की माने तो कांग्रेस ओवैसी की पार्टी के साथ कर्नाटक में एक एक्सपेरिमेंट करना चाहती है और यदि यह एक्सपेरिमेंट सफल रहा तो 2019 के लोकसभा चुनावो में ओवैसी महागठबंधन का हिस्सा भी हो सकते हैं।

सूत्रों की माने तो उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से बातचीत बिगड़ने की दशा में ओवैसी की पार्टी कांग्रेस के साथ मिलकर बड़ी भूमिका निभा सकती है।

सूत्रों के अनुसार उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अब आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहदुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की डिमांड बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस एक नए फॉर्मूले पर काम कर रही है।

जानकारों के अनुसार पिछले कुछ महीनो में सांसद असदुद्दीन ओवैसी के अंदर भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वे अपने भाषणों में घोर सांप्रदायिक मुद्दों पर बात नहीं करते बल्कि वे संविधान से जुड़े मुद्दों को आधार बनाकर अपनी बात रख रहे हैं।

फ़िलहाल देखना है कि कांग्रेस और ओवैसी की बढ़ती नजदीकियां राष्ट्रीय राजनीति पर कितना असर डालती है। सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर है कि क्या कर्नाटक में एआईएमआईएम और कांग्रेस के बीच कोई गठजोड़ बनेगा अथवा नहीं।

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