एयरपोर्ट से वापस लौटाये गए विपक्षी दलों के नेता, राहुल बोले ‘साफ है कश्मीर में हालात ठीक नहीं’

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के हालात जानने के लिए आज पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित 11 विपक्षी दलों के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर पहुंचा लेकिन प्रशासन ने किसी को श्रीनगर में प्रवेश नहीं करने दिया और श्रीनगर एयरपोर्ट से ही सभी नेताओं को वापस दिल्ली लौटा दिया गया।

इतना ही नहीं विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल जैसे ही श्रीनगर एयरपोर्ट पर पहुंचा। पुलिस ने नेताओं और मीडिया को अलग कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया ने विपक्षी नेताओं से बातचीत करनी चाही तो पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की।

दिल्ली वापस लौटने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि मैं “जम्मू-कश्मीर गवर्नर के निमंत्रण पर वहां गया था। हम देखना चाहते थे कि वहां हालात कैसे हैं लेकिन हमें एयरपोर्ट से बाहर ही नहीं जाने दिया गया। पत्रकारों के साथ बदसलूकी की गई। साफ है कि कश्मीर में हालात सामान्य नहीं है।”

श्रीनगर से विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के लौटने के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमें श्रीनगर जाने की अनुमति नहीं दी गई, लेकिन जम्मू-कश्मीर में हालात भयावह है। हमारी फ्लाइट में मौजूद कश्मीर के यात्रियों से जो कहानियां सुनीं, वह आंसू लाने वाली हैं।

इससे पहले जम्मू कश्मीर प्रशासन ने विपक्षी दलों ने कश्मीर दौरा टालने की अपील की थी लेकिन जब आज विपक्षी दलों के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर पहुंचा तो सुरक्षाकर्मियों ने सभी नेताओं को वीआईपी लौंज में बिठाया। इस दौरान मीडिया कर्मियों को वहां से अलग कर दिया गया।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विपक्षी दलों के नेताओं से बात करने की कोशिश कर रहे मीडिया कर्मियों के साथ सुरक्षा कर्मियों ने धक्का मुक्की भी की और कई मीडियाकर्मी बदसलूकी का शिकार बने।

विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, एनसीपी नेता माजिद मेमन, सीपीआई लीडर डी. राजा के अलावा शरद यादव सहित सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कांग्रेस नेता गुलामनबी आज़ाद दो बार जम्मू कश्मीर जाने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन दोनो बार उन्हें एयरपोर्ट से वापस दिल्ली भेज दिया गया।

प्रशासन ने ट्वीट कर दी सफाई :

प्रशासन ने ट्वीट करते हुए कहा था कि नेताओं के दौरे से असुविधा होगी। हम लोगों को आतंकियों से बचाने में लगे हैं। प्रशासन ने कहा कि नेता दौरा करके उन प्रतिबंधों का उल्लंघन करेंगे, जो अभी कई क्षेत्रों में लागू हैं। वरिष्ठ नेताओं को समझना चाहिए कि शांति, व्यवस्था बनाए रखने और नुकसान को रोकने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

ऐसे वक्त जब सरकार सीमा पार आतंकवाद और आतंकियों तथा अलगाववादियों के हमले से राज्य के लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है और धीरे-धीरे अराजक तत्वों और उपद्रवियों पर काबू कर स्थिति नियंत्रण में ला रही है, नेताओं को सामान्य जनजीवन की बहाली में गड़बड़ी उत्पन्न करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

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