एनआरसी: राज्य सभा में हंगामा, प.बंगाल में रेल रोको आंदोलन

नई दिल्ली। एनआरसी के दूसरे ड्राफ्ट में से 40 लाख लोगों के नाम गायब होने को लेकर अब एनआरसी की सत्यता पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। राज्य सभा में एनआरसी मुद्दे पर इस समय भारी हंगामा चल रहा है। वहीँ दूसरी तरफ एनआरसी को लेकर पश्चिम बंगाल में रेल रोको आंदोलन शुरू हो गया है।

पिछड़े वर्ग के संगठन ऑल इंडिया मटुआ महासंघ ने आज विरोधस्वरूप सियादह रेलवे स्टेशन पर आज रेल यातायात बाधित किया है। असम में एनआरसी में करीब 40 लाख लोगों को जगह नहीं मिलने के विरोध में ऑल इंडिया मटुआ महासंघ ने आज रेल रोको प्रदर्शन का आयोजन किया है।

पूर्वी रेलवे के सियालदह उत्तर स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने सुबह साढ़े आठ बजे ट्रेन रोक दी। इससे सियालदह-हसनाबाद, सियालदह-नैहाटी मार्ग पर रेल यातायात प्रभावित हुआ। प्रवक्ता आर. एन. महापात्र ने बताया, रेलवे से असंबंधित मुद्दे को लेकर आयोजित ‘रेल रोको’ के कारण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

हम प्रदर्शनकारियों से अवरोध समाप्त करने का अनुरोध कर रहे हैं, उन्हें समझाने का भी प्रयास कर रहे हैं। ठाकुरनगर, संदालिया, पाल्टा और कुछ अन्य स्टेशनों पर भी अवरोधक लगे होने की भी सूचना है। असम में एनआरसी का पूरा मसौदा 30 जुलाई को प्रकाशित होने वाला है।

वहीँ असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी पर मंगलवार को अमित शाह के बयान पर फिर हंगामा हुआ. कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने अमित शाह के बयान के उस हिस्से को रिकॉर्ड से हटाने की डिमांड की जिसमें राजीव गांधी के बाद के प्रधानमंत्रियों के साहसों पर कथित टिप्पणी की गयी थी।

सभापति वेंकैया नायडू ने परंपरा का आश्वासन दिया और अमित शाह को वक्तव्य पूरा करने के लिए आमंत्रित किया लेकिन सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया जिसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

शाह ने विपक्ष पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने का प्रयास करने का आरोप लगाया था। शाह ने राज्यसभा में अपने बयान में कहा था कि राजीव गांधी के समय समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। आपके अंदर लागू करने की हिम्मत नहीं थी, हमारे अंदर साहस था, इसलिए कर रहे हैं।

बुधवार को सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने फिर इस मामले को उठाया। आनंद शर्मा ने कहा कि राजीव गांधी के बाद नरसिम्हा राव, देवगौड़ा, अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ मनमोहन सिंह सहित सारे सम्मानित प्रधानमंत्री हुए।

उन्होंने अमित शाह का नाम लिए बिना कहा कि एक सदस्य ने इन प्रधानमंत्रियों को बुजदिल बता दिया है और कहा कि इनके अंदर हिम्मत नहीं थी। शर्मा ने कहा कि हम इसकी निंदा करते हैं और इसे रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए।

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