उपचुनाव में नहीं दिख रहे विपक्ष की एकता के आसार

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की दो और बिहार की एक लोकसभा सीट के लिए होने जा रहे उपचुनाव में विपक्ष की एकता के आसार नज़र नहीं आ रहे। उत्तर प्रदेश में फूलपुर और गोरखपुर तथा बिहार में अररिया लोकसभा सीट के लिए 11 मार्च को चुनाव होना है।

लोकसभा उपचुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस के बीच सुर मेल नहीं खा रहे। हाल ही में समाजवादी पार्टी की तरफ से कहा गया कि वह दोनो सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। वहीँ बहुजन समाज पार्टी पहले से ही किसी भी तरह के गठबंधन से इंकार करती रही है।

वहीँ दूसरी तरफ बिहार में लोकसभा की एक सीट और विधानसभा की दो सीटों पर भी उपचुनाव हो रहा है। यहाँ भी कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच पेंच फंसा है। पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद ने तीनो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का एलान कर दिया है। वहीँ कांग्रेस एक विधानसभा सीट पर अपना उम्मीदवार खड़ा करना चाहती है।

हालाँकि अभी तक किसी भी पार्टी ने उमीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन विपक्षी दलों की तरफ से जिस तरह की बयानबाज़ी सामने आ रही है उसे देखकर लगता है कि उपचुनाव के लिए किसी तरह का विपक्षी गठजोड़ होना नामुमकिन है।

उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट सीएम योगी आदित्यनाथ के इस्तीफा देने तथा फूलपुर सीट उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या के इस्तीफे से रिक्त हुई है। 2014 के लोकसभा चुनाव में ये दोनो ही सीटें बीजेपी ने जीती थीं।

वहीँ बिहार की अररिया लोकसभा सीट यहाँ से राष्ट्रीय जनता दल के सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन से खाली हुई है। 2014 में इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार के तौर पर तस्लीमुद्दीन विजयी हुए थे।

वहीँ जानकारों की माने तो उत्तर प्रदेश की जिन दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव होना है वहां यदि विपक्ष का साझा उम्मीदवार खड़ा नहीं होता तो सेकुलर मतों का विभाजन बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है।

जहाँ तक गोरखपुर संसदीय क्षेत्र का सवाल है तो यह सीट 1991 से बीजेपी के कब्ज़े में रही है वहीँ फूलपुर सीट पर काफी अरसे बाद 2014 में बीजेपी को सफलता मिली थी।

यूँ तो फूलपुर सीट कांग्रेस के बर्चस्व वाली मानी जाती थी। फूलपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस नेता विजय लक्ष्मी पंडित करती रही थीं। इस सीट पर सपा और बसपा भी जीत दर्ज कर चुकी हैं।

सबकी निगाहें भाजपा पर होंगी जो इन सीटों को वापस हासिल करना चाहेगी। उसके लिए यह उपचुनाव खास तौर पर इसलिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न है क्योंकि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में यह पार्टी प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई है।

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उनका दल हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहता है। भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है। मुझे विश्वास है कि आने वाले उपचुनाव में पार्टी और बड़े अंतर से जीतेगी।

वहीँ सपा प्रवक्ता सुनील सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा को उसकी वादाखिलाफी के लिए सबक जरूर सिखाएगी क्योंकि पिछले चुनाव में भाजपा ने जो वादे किए थे वह आज तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी दोनों ही सीटों पर जीत हासिल करेगी।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा कि कांग्रेस गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव लड़ेगी और निश्चित रूप से बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हर मोर्चे पर खासकर कानून एवं व्यवस्था के मामले में बुरी तरह नाकाम साबित हुई है। प्रदेश में डर का माहौल है और किसानों की दुश्वारियां खत्म नहीं हुई हैं।

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *