उत्तर प्रदेश के फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष के साझा उम्मीदवार के कयास

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के फूलपुर और गोरखपुर में जल्द होने जा रहे लोकसभा उपचुनाव को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के लोकसभा से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई हैं और इन सीटों पर जल्द ही उपचुनाव होना है।

सूत्रों की माने तो सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच साझा उम्मीदवार उतारने को लेकर बातचीत हुई है। सूत्रों के मुताबिक सपा बसपा एक एक सीट पर चुनाव लड़ सकते हैं तथा अजमेर(राजस्थान) सीट पर कांग्रेस को समर्थन दे सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि फूलपुर से बसपा सुप्रीमो मायावती चुनाव लड़ सकती हैं और उन्हें समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समर्थन कर सकते हैं, वहीँ गोरखपुर सीट पर सपा अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकती है और बसपा कांग्रेस उसका समर्थन कर सकते हैं। वहीँ अजमेर(राजस्थान) सीट पर कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारेगी और सपा बसपा समर्थन करेंगे।

लेकिन सूत्रो की माने तो समाजवादी पार्टी फूलपुर सीट बसपा को देने के मूड में नहीं है। सपा सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी को बसपा को गोरखपुर सीट देने में कोई एतराज नहीं है।

फूलपुर सीट पर कभी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व जवाहर लाल नेहरू चुनाव लड़ा करते थे। वे इस सीट से लगातार तीन बार 1952, 1957 और 1962 में चुनाव जीते। जवाहरलाल नेहरू के पश्चात नेहरू परिवार से सम्बन्ध रखने वाली विजय लक्ष्मी पंडित इस सीट से 1964(उपचुनाव) और 1967 में चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची। 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फूलपुर सीट पर ही लोकसभा चुनाव जीते थे।

इसके बाद अधिकांश समय गैर कोंग्रेसी दलो का कब्ज़ा रहा है। 1977 से 2014 तक यहाँ सिर्फ 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रामपूजन पटेल ने विजय हासिल की थी। उसके बाद वे अगला चुनाव जनता दल के टिकिट पर लड़े थे। इस सीट पर रामपूजन पटेल लगातार 1984, 1989, और1991 में जनता दल के टिकिट पर चुनाव जीते।

1996 में इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने कब्ज़ा कर लिया। इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने लगातार 1996,1998, 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में विजय हासिल की। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार केशव प्रसाद मौर्या ने बड़े अंतर् से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को पराजित कर सीट अपने कब्ज़े में कर ली।

वहीँ गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो इस सीट को बीजेपी के दबदबे वाली सीट माना जाता है। इस सीट पर वर्ष 1998 से लगातार 3 बार बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ चुनाव जीत चुके हैं। योगी आदित्यनाथ से पहले इस सीट पर तीन बार बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर 1989,1991 और 1996 में महंत अवैध्यनाथ चुनाव जीते थे।

यह सीट को पिछले 25 वर्षो से अधिक समय से बीजेपी के पास रही है। इसलिए बीजेपी इस सीट पर अपना कब्ज़ा बरकरार रखने का हर सम्भव प्रयास करेगी।

वहीँ सूत्रों की माने तो गैर बीजेपी दल अब इस बात को स्वीकारने लगे हैं कि सेकुलर मतों के विभाजन का फायदा सीधे तौर पर बीजेपी को मिलता है। सूत्रों ने कहा कि यदि सपा बसपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो वे दोनो सीटों पर बीजेपी को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

हालाँकि फिलहाल विपक्ष के किसी नेता ने आधिकारिक तौर पर मिलकर चुनाव लड़ने की बात नहीं कही है लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष लोकसभा उपचुनाव के बहाने 2019 के लिए एक एक्सपेरिमेंट कर सकता है।

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