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इंदिरा गांधी द्वारा मोरबी में नाक पर रुमाल रखने का सच

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मोरबी में एक चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुए वर्ष1979 में मच्छू डैम टूटने की दुर्घटना का ज़िक्र छेड़कर भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर तंज़ कसा।

पीएम मोदी ने कहा कि उस समय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यहाँ नाक पर रूमाल रखकर कर इधर उधर भागने की कोशिश कर रही थीं। हालाँकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कहा वह सच है लेकिन इस सच के पीछे का सच उन्होंने जनता को नहीं बताया।

11 अगस्त 1979 को मच्छू डैम टूटने की बड़ी दुर्घटना हुई थी। डैम टूटने के 20 मिंनट के अंदर ही मोरबी टाउन के अंदर 12 से 30 फीट तक पानी भर गया। इंडियन वाटर पोर्टल के अनुसार अचानक टूटे डैम से हुए आयी बाढ़ में लोगों को सम्भलने का मौका भी नहीं मिला। इसमें हज़ारो लोगों और मवेशियों की जाने चली गयीं।

इस दौरान डैम टूटने से पानी के बहाव ने बिकराल रूप धारण कर लिया था और आसपास के इलाके जलमग्न हो गए थे। जिसके चलते कई इंसानों और पशुओं की जान की तबाही हुई थी। कई जगह पानी में लाशे सड़ गयी थीं।

जलभराव और लाशें सड़ने से पूरे इलाके में मोरबी में चारों तरफ़ बहुत बदबू फैली हुई थी और महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया था। उस समय जो भी मोरबी गया उसके लिए मुंह पर रूमाल बांधना अनिवार्य कर दिया गया था।

राहत और बचाव में जुटे सभी लोग मूँह पर रुमाल बाँध कर काम कर रहे थे। यहाँ तक कि आरएसएस के स्वयं सेवको ने भी मूँह पर रूमाल बांध रखा था। इस दुर्घटना के बाद राहत और बचाव कार्यो का जायजा लेने पहुंची तत्कालीन प्रधानमंत्री को भी महामारी के प्रकोप के बचने के लिए नाक पर रुमाल रखना पड़ा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मोरबी की सभा में 38 साल पुरानी दुर्घटना का ज़िक्र छेड़कर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा नाक पर रुमाल रखने का अधूरा सच बताया। उन्होंने यह नहीं बताया कि इंदिरा गांधी को नाक पर रुमाल क्यों रखना पड़ा।

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