आज आएंगे 4 लोकसभा और 10 विधानसभा उपचुनाव के परिणाम

नई दिल्ली। देश की चार लोकसभा सीट और 10 विधानसभा सीट पर सोमवार को हुए मतदान के बाद बुधवार को कैराना के 73 और महाराष्ट्र के भंडारा गोंदिया सीट के 39 पोलिंग बूथ पुनर्मतदान सम्पन्न हो गया। उपचुनाव के नतीजे कल घोषित किये जायेंगे।

बुधवार को कैराना लोकसभा सीट के 73 बूथों पर हुए पुनर्मतदान में 58.75 फीसदी मतदान होने की खबर है। इससे पहले सोमवार को कैराना और भंडारा गोदिया सीट पर बड़ी तादाद में ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें आयी थीं। जिसके बाद चुनाव आयोग ने कैराना और भंडारा गोंदिया ने ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत वाले चुनिंदा बूथों पर फिर में मतदान के आदेश दिए थे।

जिन चार लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ उनमे उत्तर प्रदेश की कैराना, महाराष्ट्र की पालघर और भंडारा गोंदिया तथा नागालैंड की एक लोकसभा सीट शामिल है। वहीँ जिन दस सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव हुआ है उनमे यूपी की नूरपुर विधानसभा सीट के साथ बिहार, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की विधानसभाएँ शामिल है।

वर्ष 2014 में कैराना, महाराष्ट्र की भंडारा गोंदिया और पालघर तीनो सीटें बीजेपी ने जीती थीं वहीँ नागालैंड संसदीय सीट पर नागा पीपल्स फ्रंट का उम्मीदवार विजयी हुआ था।

महाराष्ट्र की भंडारा गोंदिया सीट से सांसद नाना पटोले अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में तीनो लोकसभा सीटें जीतना बीजेपी के लिए साख का प्रश्न है। इससे पहले हुए उपचुनावों में बीजेपी अलवर, अजमेर, गोरखपुर और फूलपुर सीटों को गंवा चुकी है।

उत्तर प्रदेश के कैराना में बीजेपी को विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार से कड़ी चुनौती मिली है। देखना होगा कि बीजेपी 2014 में जीती हुई तीनो सीटों पर वापसी करती है या उसे सीटें गंवानी पड़ेंगी। फिलहाल सभी की निगाहें कल आने वाले चुनाव परिणामो पर टिकी हैं।

कैराना में बीजेपी के पक्ष में नहीं हैं समीकरण :

पांच विधानसभाओं वाले कैराना में मुस्लिम मतदाताओं और जाट मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। पिछले चुनाव में सपा, बसपा ने अलग अलग चुनाव लड़ा था जिसके चलते मुसलिम और जाट मतों के विभाजन का बीजेपी को फायदा मिला था। लेकिन इस बार स्थति पहले से बिलकुल अलग है।

इस बार बीजेपी का मुकाबला संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार से है। कैराना में जातिगत आंकड़ों को देखा जाए तो इस बार सियासी समीकरण पूरी तरह बीजेपी के खिलाफ है। करीब 16 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर करीब साढ़े पांच लाख मुसलमान वोट हैं। जबकि 1.8 लाख जाट मतदाता हैं और करीब ढाई लाख दलित मतदाता हैं। जबकि गूजर और कश्यप मतदाता डेढ़-डेढ़ लाख हैं।

जानकारों की माने तो 2014 की तरह इस बार जाट मतदाता एकतरफा बीजेपी को वोट नहीं करेंगे। जाट किसानो में गन्ना के बकाये के भुगतान न होने को लेकर नाराज़गी के चलते इस बार जाट मतदाताओं का बड़ी तादाद में रालोद उम्मीदवार की तरफ झुकाव देखा गया है। ऐसे में पांच लाख मुस्लिम मदताओं के वोटों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चूँकि रालोद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहीं तबस्सुम हसन स्वयं मुस्लिम समुदाय से आती हैं तथा चुनाव में कोई अन्य मुस्लिम उम्मीदवार नहीं है। ऐसे में रालोद उम्मीदवार को बड़ी तादाद में मुस्लिम मत मिलते दिखाई दे रहे हैं जो उसकी जीत का आधार बन सकते हैं। वहीँ यदि जाट मतदाताओं ने भी बीजेपी के खिलाफ अपनी नाराज़गी को वैलेट में बदला तो बीजेपी के लिए साख बचाना भी भारी होगा।

वहीँ इस बार रालोद उम्मीदवार को बहुजन समाज पार्टी का भी समर्थन प्राप्त है। ऐसे में ढाई लाख दलित मतदाता रालोद उम्मीदवार को बड़ी तादाद में मतदान करके बीजेपी की पराजय सुनिश्चित कर सकते हैं।

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