अहिंसा समाज पार्टी का 230 सीटों पर लड़ने का एलान, बिगड़ सकता है बड़ी पार्टियों का अंक गणित

भोपाल ब्यूरो। मध्य प्रदेश में इस वर्ष होने जा रहे विधान सभा चुनावो में भले ही सत्ता की रस्सकशी दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और बीजेपी के बीच हो लेकिन अहिंसा समाज पार्टी के मैदान में आने से कई जगह मामला त्रिकोणीय होने की सम्भावना है।

अहिंसा समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष क्यू एम नवेद ने एलान किया है कि पार्टी 230 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। ऐसे में कई विधानसभा क्षेत्रो में परिणामो में उलटफेर होने की संभावना है।

क्यू एम नावेद के अनुसार विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन का काम काज अंतिम दौर में चल रहा है। इसके अलावा सभी विधानसभाओं में बूथ कमेटियां भी गठित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि बूथ पर बीजेपी के पन्ना प्रमुखों से निपटने के लिए अहिंसा समाज पार्टी एक बूथ दस यूथ की रणनीति लेकर काम करेगी। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अहिंसा समाज पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए प्रतिदिन इसमें नए लोग शामिल हो रहे हैं।

क्यू एम नवेद ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि अन्य राजनैतिक दलों से बेहतर करें। उन्होंने कहा कि हम ताकत हासिल करने के लिए नहीं बल्कि जनता को ताकत देने निकले हैं। उन्होंने कहा कि अहिंसा समाज पार्टी अन्य राजनैतिक दलों से कई मायनो में भिन्न है। हमारे यहाँ वे कार्यकर्त्ता सर्वोपरि है जो जनता की आवाज़ बनकर काम कर रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हम वे मुद्दे लेकर चुनाव में उतरेंगे जो सीधे सीधे जनता से जुड़े हैं। क्यू एम नवेद ने कहा कि केंद्र की सत्ता में पहुँचने से पहले बीजेपी महंगाई कम करने को लेकर बड़े बड़े दावे करती थी लेकिन आज पेट्रोल डीजल की कीमतों पर केंद्र सरकार के मंत्री बात करने से बच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में बेरोज़गारी लगातार बढ़ती जा रही है, युवाओं के पास काम नहीं है। क्यू एम नवेद ने कहा कि राज्य में दस वर्ष तक कांग्रेस और पंद्रह वर्षो तक बीजेपी की सरकार रही लेकिन किसी भी सरकार ने राज्य में उद्योगों की स्थापना पर कोई ध्यान नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि यही हाल महिला सुरक्षा का भी है। जब कोई बड़ी घटना हो जाती है तो एक दो दिन सीएम शिवराज और उनके मंत्रियों के बयान अवश्य आते हैं लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया। क्यू एम् नवेद ने कहा कि केवल बयानबाज़ी और खोखले आश्वासन जनता कब तक बर्दाश्त करेगी। उन्होंने कहा कि इस विधानसभा में जनता बीजेपी और कांग्रेस दोनों आईना दिखा देगी।

बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनावो में करीब 4 दर्जन सीटों पर हार जीत का फासला पांच हज़ार वोटों से भी कम का रहा था। इस बार चुनाव में अहिंसा समाज पार्टी के उम्मीदवार भी मौजूद होंगे। चूँकि अहिंसा समाज पार्टी एक नई पार्टी है इसलिए ज़ाहिर है कि उसके उम्मीदवार जो भी वोट खींचेंगे वह कांग्रेस और बीजेपी के ही होंगे।

ऐसे में इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि कहीं कहीं मामला दिपक्षीय होने की जगह त्रिकोणीय भी हो सकता है और जीता हुआ चुनाव भी हाथ से निकल सकता है। फिलहाल देखना है कि बीजेपी और कांग्रेस में पैदा हुई बेचैनी विधानसभा चुनाव तक क्या रूप लेती है और चुनाव में कितनी सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय और कितनी सीटों पर द्विपक्षीय होता है।

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