असम: एनआरसी से पूर्व राष्ट्रपति के परिजनों के नाम भी गायब

नई दिल्ली। नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन (एनआरसी) के दूसरे ड्राफ्ट में से कई ऐसे लोगों के नाम भी गायब हैं जिसके बाद एनआरसी पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं।

पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार का नाम असम की नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन में नहीं हैं। इसके अलावा भी कई गणमान्य लोगों के नाम एनआरसी से गायब बताये जा रहे हैं।

जिन 40 लाख लोगों को एनआरसी में अवैध नागरिक बताया गया है उनमें 72 साल के रिटायर्ड टीचर, 6 साल के बच्चे, एमएलए से लेकर समाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

फिलहाल एनआरसी की वैधता को लेकर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि एनआरसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाले लोगों ने किस तरह डेटा जुटाया होगा इसका सबूत इस बात से मिलता है कि एनआरसी के ड्राफ्ट में कई मामले ऐसे हैं जिनमें माता-पिता का नाम है तो बच्चों का नहीं तो कहीं एक भाई का नाम है तो एक का नहीं।

एनआरसी का दूसरा ड्राफ्ट आने के बाद अब लोगों का कहना है कि सरकार इसे जल्दबाज़ी में लागू करना चाहती है। यही कारण है कि एनआरसी के डेटा कलेक्शन पर सिर्फ खानापूर्ति ही की गयी है।

एनआरसी के दूसरे ड्राफ्ट में अभयपुरी से एआईयूडीएफ के पूर्व एमएलए अनंत कुमार मालो का नाम गायब है, जबकि उनकी पत्नी और भाई का नाम शामिल है।

इसी तरह कई शिक्षकों का नाम भी गायब है जबकि उनके बच्चो का नाम एनआरसी में दर्ज है। यहाँ तक कि एक साथ एक तरह के डॉक्युमेंट जमा करने वाले एक परिवार के पति पत्नी में से पत्नी का नाम तो एनआरसी में शामिल किया गया है जबकि पति का नाम गायब है।

NRC के आधार पर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं: सुप्रीम कोर्ट

असम में नागरिक रजिस्टर के मामले में सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ कर दिया कि ड्राफ्ट मसौदे के आधार पर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बेहतर होगा, ‘आप ही निर्देश दें कि जिनका नाम सूची में दर्ज नहीं है उनके खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस पर अदालत ने साफ कहा, ‘हम फिलहाल कोई निर्देश नहीं देंगे। अभी आप पूरी तफसील के साथ क्लेम और रिजेक्शन को लेकर मानक कार्य प्रक्रिया तैयार करें. हम उसे अपनी मंज़ूरी देंगे। हम फिलहाल चुप रहेंगे लेकिन इस चुप्पी का मतलब ये नहीं है कि हम आपकी स्कीम से सहमत हैं या असहमत।’

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