अयोध्या विवाद: मुसलमानो को मध्यस्थता स्वीकार, हिन्दू महासभा ने जताया विरोध

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने जहाँ मध्यस्थता को लेकर इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा है वहीँ कोर्ट का साफतौर पर कहना है कि यह मामला भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए इस मामले का हल आपसी बातचीत से निकाला जाना चाहिए।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में बनी पीठ ने पक्षकारों से मध्यस्थों के नाम देने को कहा है। सुनवाई के दौरान जस्टिस एसए बोबड़े ने कहा है कि ये मामला जमीन से नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसका हल आपसी सहमति से ही निकलना चाहिए।

वहीं, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ये मामला किसी पार्टी का नहीं बल्कि दो समुदाय के बीच का विवाद का है, इसलिए मामले को सिर्फ जमीन से नहीं जोड़ा जा सकता है।

सुप्रीमकोर्ट की मध्यस्थता में बातचीत से हल निकालने के मुद्दे पर बाबरी मस्जिद के पक्षकार सहमत हैं वहीँ हिन्दू महासभा को यह स्वीकार नहीं है और उसने इसका विरोध किया है।

क्या कहते हैं बाबरी मस्जिद के पक्षकार:

मस्जिद पक्ष की ओर से राजीव धवन ने कोर्ट में कहा है कि मस्जिद पक्ष मध्यस्थता के लिए तैयार है। उन्होंने ये भी कहा कि हम किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि मध्यस्थता पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।

क्या कहते हैं हिन्दू महासभा के पक्षकार:

हिंदू महासभा की ओर से वकील हरिशंकर जैन ने किसी भी तरह का समझौता करने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट में पार्टियां मान जाती हैं, तो आम जनता इस समझौते को नहीं मानेगी। उनकी ओर से ये भी कहा कि इसके लिए पब्लिक नोटिस देना जरूरी है, जिसमें काफी लंबा समय लगता है। हिंदू महासभा की ओर से कहा गया कि क्योंकि ये हमारी जमीन है इसलिए हम मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं हैं।

क्या कहते हैं रामलला के पक्षकार:

रामलला की ओर से सीनियर वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि अयोध्या राम की जन्मभूमि है, इसलिए ये एक आस्था का विषय हैइसलिए इसमें किसी तरह का समझौता नहीं हो सकता है। इसमें सिर्फ यही फैसला हो सकता है कि मस्जिद कही ओर बना सकते हैं, हम इसके लिए क्राउडफंडिंग करने के लिए भी तैयार हैं। मध्यस्थता का कोई सवाल नहीं होता है।

माना जा रहा है कि मध्यस्थता को लेकर सुप्रीमकोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद सभी पक्षकारो के बीच बातचीत के लिए आम सहमति बनाने के प्रयास होंगे।

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