अयोध्या विवाद: अब दोनों पक्षकारो ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कही ये बात

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर कोर्ट के फैसले में हो रही देरी को लेकर अब दोनों पक्षकारो ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि मंदिर-मस्जिद विवाद की सुनवाई के लिए विशेष न्याय पीठ का गठन किया जाए और इस न्यायपीठ से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अलग रखा जाए।

राष्ट्रपति को यह पत्र सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद के पक्षकार मु. इकबाल अंसारी, राममंदिर के पक्षकार महंत धर्मदास व उनके अधिवक्ता और पूर्व जज वीरेंद्र चौबे ने भेजा है।

पत्र में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की 29 अक्टूबर की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था ‘यह कोई प्राथमिकता वाला मुकदमा नहीं है, एवं इसकी लिस्टिग फरवरी, मार्च या अप्रैल 2019 में होगी या नहीं कोई निश्चित नहीं है’।

पत्र में दोनों पक्षकारों व अधिवक्ता वीरेंद्र चौबे ने मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी को आधार बना कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस वाद अथवा अपील का निस्तारण स्वयं नहीं करना चाहते या मुकदमे को मनमाने तरीके से लंबित रखना चाहते हैं। अगर ऐसा ही रहा तो अगला मुख्य न्यायाधीश भी इस मुकदमे की सुनवाई नहीं करेगा, जिससे इस मुकदमे का फैसला कभी नहीं हो सकेगा।

राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि इस मुकदमे के निस्तारण पर देश के दो प्रमुख समुदायों की आस्था टिकी है और न्यायपालिका इस मुकदमे के निस्तारण में अनायास व मनमाने तरीके से विलंब कर रही है। इस पत्र की प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय, लोकसभा अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी प्रेषित की गई है।

गौरतलब है कि अयोध्या की विवादित भूमि को लेकर सुप्रीमकोर्ट में पहली सुनवाई 29 अक्टूबर को हुई थी। इस सुनवाई में कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए जनवरी 2019 का समय तय किया है।

कोर्ट इस मामले को लेकर पहले ही कह चूका है कि इस मामले की सुनवाई ज़मीन के मालिकाना हक़ के आम मामलो की तरह ही की जायेगी। इसलिए इसे भावनाओं से जोड़कर न देखा जाए।

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