अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए 5 जजों की खंडपीठ का गठन

नई दिल्ली। अयोध्या में भूमि विवाद की सुनवाई के लिए सुप्रीमकोर्ट में पांच जजों की खंडपीठ का गठन किया गया है। यह खंडपीठ 10 जनवरी से मामले पर सुनवाई शुरू करेगी।

इससे पहले सुप्रीमकोर्ट में 29 अक्टूबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को जनवरी के पहले सप्ताह तक के लिए टाल दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई के लिए जनवरी के प्रथम सप्ताह में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी।

इस मामले में जल्द सुनवाई के लिए अखिल भारत हिन्दू महासभा ने एक अर्जी दायर कर सुनवाई की तारीख पहले करने का अनुरोध किया था परंतु न्यायालय ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था।

सुप्रीमकोर्ट कोर्ट इस मामले में पहले ही साफ़ कर चूका है कि अयोध्या के विवादित ज़मीन मामले की सुनवाई आम ज़मीन के मामलो की तरह ही होगी। कोर्ट के इस आशय से साफ़ है कि यह मामला एक दो तारीखों में निपटने वाला नहीं है।

मामला पेचीदा होने के चलते कोर्ट इसमें सभी पहलुओं पर विचार और सबूत देखने के बाद ही कोई निर्णय देगा। इस मामले से जुड़े कई दस्तावेज हिंदी के अलावा अन्य भाषाओँ में होने के चलते भी इस मामले की सुनवाई में देरी हुई है।

वहीँ दूसरी तरफ हिन्दू संगठनों द्वारा लगातार कानून बनाकर मंदिर निर्माण की मांग को पीएम नरेंद्र मोदी ख़ारिज कर चुके हैं। अभी हाल ही में न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में पीएम मोदी ने साफ़ तौर पर कहा कि सुप्रीमकोर्ट का फैसला आने से पहले सरकार अध्यादेश लाने पर विचार नहीं कर रही।

दूसरी तरफ आम चुनावो का समय करीब आने से इस मामले में राजनैतिक बयानबाज़ी भी लगातार बढ़ रही है। राम मंदिर मुद्दे को गर्माकर सत्ता के शिखर तक पहुंची बीजेपी के लिए मुश्किल यह है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव में राम मंदिर के मुद्दे पर जनता को कुछ बताने की स्थति में नहीं है।

ऐसे हालातो में यदि आम चुनावो से पहले राम मंदिर पर सुप्रीमकोर्ट का फैसला नहीं आया तो आम चुनावो में जहाँ विपक्ष राम मंदिर निर्माण न होने पाने को बीजेपी की कमज़ोरी के तौर पर उछालेगा वहीँ बीजेपी को इस मामले में चुनाव से पहले अपनी सफाई पेश करने के लिए तैयार रखना होगा।

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