अब राम मंदिर,धारा 370, कॉमन सिविल कोड नहीं बल्कि घुसपैठियों की बात कर रही बीजेपी

ब्यूरो (राजाज़ैद)। राम मंदिर, धारा 370 और कॉमन सिविल कोड की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी घुसपैठियों को देश से बाहर करने की बात कह रही है।

80 के दशक में राम मंदिर मुद्दे को गरमा कर अपनी ताकत बढ़ाने वाली भारतीय जनता पार्टी केंद्र में दो बार पूर्ण कालिक सत्ता पाने के बावजूद अब राम मंदिर पर खुलकर बोलने से परहेज कर रही है। यही हाल कश्मीर में धारा 370 को हटाने को लेकर भी है।

फिलहाल बीजेपी यह कहने की स्थति में नहीं है कि जनता ने उसे मौका नहीं दिया। जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी की सरकार बनने के बावजूद बीजेपी नेता धारा 370 पर बोलने से कतराते रहे।

कश्मीर को लेकर समय समय पर बीजेपी नेताओं की ज़ुबान बदलती रही। जम्मू कश्मीर में बीजेपी पीडीपी सरकार के रहते कभी कश्मीर में पत्थरबाज़ी की बात तो कभी सीमा पार से आतंकी हमलो पर तो बीजेपी नेता बोलते सुनाई दिए लेकिन कश्मीर से धारा 370 हटाने के अपने पुराने एजेंडे पर खामोश रहे।

अब पार्टी ने 2019 के चुनाव के लिए मुद्दों पर धार रखना शुरू कर दिया है। राम मंदिर पर पार्टी सुप्रीमकोर्ट में मामला होने का हवाला देकर अपना बचाव करेगी और केंद्र सरकार की कोई ऐसी ठोस उपलब्धि नहीं है जिसे 2019 के चुनाव में भुनाया जा सके। इसलिए बीजेपी नेता अभी से घुसपैठियों और असम की तर्ज पर देशभर में एनआरसी लाने की बातें कह रहे हैं।

2014 में जिन वादों से जनता का वोट हासिल कर बीजेपी केंद्र की सत्ता तक पहुंची थी, फिलहाल उन वादों में से अधिकतर वादे मूँह के बल गिरते दिखाई दे रहे हैं। महंगाई, गंगा की सफाई, महिला सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर फ़िलहाल बीजेपी को सफाई देना भी मुश्किल हो रहा है। रही सही कसर डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमतों ने पूरी कर दी है।

ऐसे में बीजेपी के सामने बड़ी मुश्किल यही है कि आखिर अब जनता के समक्ष ऐसा क्या पेश किया जाए जो 2019 के चुनाव में पार्टी के पक्ष में लहर पैदा कर सके। फिलहाल ऐसा लगता है कि बीजेपी अगला चुनाव देश से घुसपैठियों को बाहर करने के मुद्दे पर केंद्रित करना चाहती है।

खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बयानों से कुछ ऐसे ही संकेत मिले हैं। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में रविवार को एक चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि यदि 2019 में बीजेपी सत्ता में आयी तो देश में से घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा।

होशंगाबाद में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के भाषण की दो ख़ास बातें रहीं। पहला यह कि उनका भाषण बेहद संक्षिप्त था और वे मात्र 35 मिनट ही बोले। दूसरी अहम बात अमित शाह ने अपने दावे में कहा कि यदि 2019 में बीजेपी की सरकार आयी तो देश से घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा। सम्भवतः यह अवसर था जब बीजेपी अध्यक्ष ने 2019 में बीजेपी की सरकार बनने के दावे में “यदि” शब्द का इस्तेमाल किया।

अमित शाह के इससे पहले के भाषणों पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि उन्होंने 2019 में बीजेपी की सत्ता में वापसी को लेकर यदि या अगर शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है।

फिलहाल सभी की निगाहें पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावो पर लगी हैं। यदि बीजेपी तीन अहम राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पराजित होती है तो निश्चित तौर पर उसकी कमर टूटना तय है। ऐसे में बीजेपी को 2019 के चुनाव से पहले अपनी नीति, अपने नारो और अपने नेताओं पर फिर से मंथन करना पड़ेगा।

जानकारों की माने तो 2014 में किये गए वादे पूरे न होने से बीजेपी में अंदरूनी तौर पर खलवली मची हुई है। यही कारण था कि बीजेपी केंद्र और राज्य के चुनाव एक साथ कराने पर ज़ोर दे रही थी। जिससे सरकार की दिन प्रतिदिन बन रही नकारत्मक छवि से चुनावो में बड़ा नुकसान न हो।

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