अब पुराने गढ़ो पर कांग्रेस की नज़र, प्रियंका जा सकती हैं वाराणसी

लखनऊ ब्यूरो। लोकसभा चुनाव से पहले अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी कांग्रेस की नज़रें अब अपने उन लोकसभा सीटों पर हैं जो कभी उसके पारम्परिक गढ़ कहे जाते थे।

फतेहपुर, इलाहाबाद (प्रयागराज), वाराणसी जैसी लोकसभा सीटें कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थीं लेकिन उत्तर प्रदेश में बसपा सपा जैसे सक्षेत्रीय क्षेत्रीय दलों के बढ़ते प्रभाव से कांग्रेस के पारम्परिक मतदाताओं में सेंधमारी के चलते कहीं न कहीं ये इलाके पार्टी के हाथ से जाते रहे हैं।

प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाये जाने के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रियंका गांधी जल्द अपने दौरों की शुरुआत इन्ही इलाको से करेंगी। पार्टी सूत्रों की माने तो प्रियंका गांधी, इलाहाबाद, फतेहपुर और वाराणसी जैसे पुराने गढ़ो पर ख़ास ध्यान देंगी। प्रियंका गांधी जल्द ही वाराणसी और इलाहाबाद का दौरा करेंगी।

वाराणसी लोकसभा सीट पर 1952, 1957, 1962, 1971, 1980, 1984 और 2004 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार विजयी रहे थे वहीँ 1991 से 1999 तक लगातार चार चुनावो में वाराणसी सीट बीजेपी पर बीजेपी ने अपना कब्ज़ा बरक़रार रखा। इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी की लेकिन 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यह सीट एक बार फिर अपने कब्ज़े में ले ली।

अब माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी एक बार फिर वाराणसी, इलाहाबाद और फतेहपुर जैसी कांग्रेस की पारम्परिक लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को संजीवनी देने का काम करेंगी। हालाँकि आधिकारिक रूप से कांग्रेस ने अभी कोई एलान नहीं किया है लेकिन पार्टी सूत्रों ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपने दौरों की श्रंखला में प्रियंका गांधी शुरुआत इलाहाबाद या वाराणसी से कर सकती हैं।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि प्रियंका गांधी जिस तरह इलाहाबाद, वाराणसी और फतेहपुर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ज़मीनी फीडबैक ले रही हैं उससे ज़ाहिर होता है कि कांग्रेस अपने पुराने परम्परिक गढ़ो की तरफ एक बार फिर से रुख कर रही है।

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